चिराग और नीतीश में नहीं बन रही सहमति

नगीन बारकिया

अब जब बिहार राज्य विधानसभा चुनावों की बिसात बिछ चुकी है और किसी भी दिन मैदान में उतरने का बिगुल बज जाना है तब सत्ताधारी राजग में दरार दिखाई देने लगी है जो अच्छा संकेत नहीं है। सीटों के वितरण को लेकर जदयू नेता नीतीश कुमार तथा लोजपा नेता चिराग पासवान में सहमति नहीं बन पा रही है। बताया गया है कि चिराग पासवान आज दोपहर में पार्टी सांसदों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में तय होगा कि लोजपा बिहार में राजग के सहयोगी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरेगी या फिर अकेले किस्मत आजमाएगी। चिराग की आज की बैठक में रामविलास पासवान और पशुपति पारस बीमार होने के चलते शामिल नहीं हो सकेंगे। उल्लेखनीय है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद कहा था कि भाजपा और लोजपा बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे। इस पर चिराग पासवान ने कहा था कि भाजपा को नीतीश कुमार पर भरोसा है और उन्हें भाजपा पर विश्वास है। इसके बावजूद बात बनने में कठिनाई आने का कारण गहराई से जानना होगा।

वोटरों को मास्क पहनना हो सकता है अनिवार्य
कोरोना वायरस के चलते वैसे तो चुनाव या उपचुनाव कराना एक जोखिम भरा काम है लेकिन संवॆधानिक व्यवस्थाओं के कारण जब इन चुनावों को कराना मजबूरी हो रही है तो यह भी संभव है कि इसमें सहभागिता की कोई शर्त आचार संहिता में शामिल की जाए। चुनाव आयोग की जो टीम हाल ही में बिहार का दौरा करके लौटी है, कम से कम उसने यही संकेत दिए है। बताया जाता है कि टीम के सदस्यों ने वोट देने आए मतदाताओं के लिए मास्क और ग्लब्स जरूरी किए जाने का सुझाव दिया है। यह भी कहा गया है कि चुनावी डयूटी में आए केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस के लिए सैनिटाइजर का प्रयोग अनिवार्य होगा। चुनाव आयोग की दो सदस्यीय टीम ने मंगलवार को मुख्य सचिव के साथ समीक्षा बैठक की थी जिसमें यह बातें निकलकर आई हैं। सरकार के अफसरों ने वोटरों के लिए मास्क अनिवार्य करने का जो सुझाव दिया इस पर आयोग की टीम ने कोई राय दिए बगैर कहा कि इसे कोविड-19 महामारी की गाइडलाइन में पहले से ही शामिल किया जा चुका है। बताया गया है कि चुनाव आयोग बिहार की चुनावी तैयारियों से संतुष्ट है और किसी भी दिन मतदान की तिथियों की घोषणा की जा सकती है।

सीमा विवाद पर विपक्ष को जानकारी देंगे बशर्तें….
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा भारत-चीन सीमा पर हो रहे तनाव और विवाद को लेकर चल रही गतिविधियों के बारे में संसद में जानकारी देने के बावजूद इस बारे में और अधिक जानने हेतु विपक्ष की आतुरता और दबाव को देखते हुए मोदी सरकार ने अपनी तैयारी दिखाई है। सूत्रों के अनुसार मामला संवेदनशील होने से शायद सरकार सामूहिक तौर पर यह जानकारी देने के बजाय दलों को अलग अलग बुलाकर बंद कमरे में मीटिंग कर उन्हें स्थितियों से अवगत कराने पर विचार कर रही है। अभी तक इस तरह की बैठक पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। इस बैठक में सरकार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य गतिरोध को लेकर विपक्षी दलों को जानकारी दे सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती है। रक्षा मंत्रालय स्थिति को सामान्य करने के प्रयासों पर बंद कमरे में अलग-अलग दलों के नेताओं को संक्षिप्त विवरण दे सकता है। इस दौरान उनके सवालों का जवाब देने की भी कोशिश की जाएगी

लद्दाख में 50 हजार सैनिकों की तैनाती, गाढ़ा तंबू
लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन में तनातनी लगातार अप्रैल माह से जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत ने जमकर अपने तंबू गाढ़ दिए हैं और अत्याधुनिक हथियारों से लैस भारतीय सेना की आमद भी वहां पर बढ़ा दी गई है। बताया जाता है कि धीरे धीरे पूर्वी लद्दाख के बर्फीले इलाकों में सेना की तैनाती की जा रही है। कड़ाके की सर्दी में भी वहां 50 हजार सैनिकों की तैनाती की संभावना है। बताया जाता है कि यह तैनाती चालबाज चीन की किसी भी चाल का जवाब देने के लिए पर्याप्त होगी। सैन्य सूत्रों के अनुसार सर्दियों के कपड़े, राशन, आर्कटिक टेंट से लेकर पोर्टेबल हीटर तक पहुंचाने के लिए सैन्य विमान और हेलीकॉप्टर तकरीबन रोजाना लद्दाख के लिए उड़ान भर रहे हैं। मंगलवार को सामने आईं नई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि किस तरह सेना ऊंचाई वाली जगह पर तैनात जवानों तक चीजें पहुंचाने के लिए असाधारण प्रयास कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि उपकरण पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम भी उठाए गए हैं।

Related Articles