संयुक्त राष्ट्र में भारत की राह में फिर चीनी रोड़ा

नगीन बारकिया

यह कोई नई बात नहीं है कि भारत की प्रगति और विश्व में बढ़ती ताकत चीन को फूटी आंखों भी नहीं सुहा रही है। इस पर सुरक्षा परिषद में दो साल की अस्थायी रूप से मजबूत उपस्थिति ने तो उसके लिए दोहरा दर्द देने का काम किया है। इसलिए स्वाभाविक है कि चीन संयुक्त राष्ट्र में भारत के पक्ष में उठने वाले हर कदम को थामने और खत्म करने का प्रयास करेगा। इसीलिए चीन यूएन में अलग अलग तरीकों से भारत की राह में रोड़ा खड़ा करने का प्रयास कर रहा है। इसी के तहत उसने ताजी हरकत के रूप में अपने वीटो का उपयोग कर यूएन की अलकायदा प्रतिबंध समिति की अध्यक्षता करने से भारत को रोक दिया। इस समिति का महत्व इसलिए अधिक है कि यह समिति आतंकियों को प्रतिबंधित सूची में डालने का काम करती है। हालांकि 1 जनवरी 2021 से सुरक्षा परिषद में शरीक भारत आतंकवाद निरोधक मामलों और लीबिया व तालिबान सम्बन्धी मसलों की कमेटी की अध्यक्षता हासिल कर चुका है। सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों के लिए क्रमिक अध्यक्षता का प्रावधान है। साथ ही परिषद के मातहत काम करने वाली विभिन्न कमेटियों में अस्थाई सदस्यों को भी अगुवाई का मौका दिया जाता है। चीन अकेला ऐसा देश था जिसने अलकायदा कमेटी में भारत की अध्यक्षता के प्रस्ताव का विरोध किया। बीते दिनों जब भारत के आतंकवाद विरोधी मामलों को देखने वाली और आतंकवादियों व आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध तय करने वाली अल कायदा प्रतिबंध कमेटी की अध्यक्षता का मामला आया तो चीन ने अड़ंगा लगाया। ऐसे में अध्यक्षता नॉर्वे को दी गई। हालांकि भारत आतंकवाद निरोधक मामलों सम्बन्धी समिति की अध्यक्षता करेगा।

ओवैसी ने अब अखिलेश और सपा पर कसा तंज
एआईएमआईएम नेता सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को उप्र दौरे पर सपा और सपा नेता अखिलेश यादव को अपने निशाने पर रखा। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी रणनीति का संकेत देते हुए ओवैसी ने सपा को मुख्य चुनौती दी और तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव और सपा तो अब केवल फेसबुक पर ही नजर आते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि बिहार की तरह यहां भी ओवैसी सत्ताधारी दल भाजपा की जगह विपक्षी दलों सपा और बसपा का ही खेल बिगाड़ने मैदान में आए हैं। उन्होंने हर सीट पर अपने गठबंधन का प्रत्याशी उतारने की घोषणा भी की। उल्लेखनीय है कि ओवैसी ने यूपी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के साथ मिलकर भागीदारी संकल्प मोर्चा के गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दौरे के दौरान उनके साथ सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी साथ-साथ रहे।

बाबरी विध्वंस मामला अभी भी जीवित है
अयोध्या का विवादित ढांचा विध्वंस मामला अभी भी न्यायालयों में जिंदा है। अब बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई होगी। अयोध्या निवासी हाजी महबूब अहमद और सैयद अखलाक अहमद की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका में इस मामले के आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह समेत सभी 32 अभियुक्तों को बरी करने के विशेष अदालत के 30 सितम्बर 2020 के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका 8 जनवरी को दाखिल की गई थी जो बुधवार को न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की एकल सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है। याचिका में कहा गया है कि याचीगण इस मामले में गवाह थे, साथ ही वे 6 दिसम्बर 1992 को हुई विवादित ढांचा विध्वंस की घटना के पीड़ित भी हैं। उन्होंने विशेष अदालत के समक्ष प्रार्थना पत्र दाखिल कर खुद को सुने जाने की मांग भी की थी लेकिन विशेष अदालत ने उनके प्रार्थना पत्र को खारिज कर

कभी भी बज सकता है पांच राज्यों में चुनावों का बिगुल
पश्चिम बंगाल समेत चार राज्यों व एक केंद्र शासित प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं और इन राज्यों में कभी भी चुनावी बिगुल बज सकता है। आयोग ने मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला के साथ बैठक की। आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन में आयोजित बैठक में चुनावों के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की आवश्यकता और उपलब्धता को लेकर चर्चा की गई। निर्वाचन आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु के साथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की उपलब्धता के अलावा कई अन्य मुद्दों पर भी बात की गई। इन राज्यों में मौजूदा सरकारों का कार्यकाल इस साल मई और जून में खत्म हो रहा है। ऐसे में अप्रैल-मई के दौरान विधानसभा चुनावों के आयोजन की संभावना है।

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