बिहाइंड द कर्टन/ऑनलाइन होगा मरीजों का डाटा, पीएमओ तक जाएगा अलर्ट

– प्रणव बजाज

Data of patients will be online, alert will go till PMO

ऑनलाइन होगा मरीजों का डाटा, पीएमओ तक जाएगा अलर्ट
मध्यप्रदेश में एक अप्रैल से आईएचआईपी यानी इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफॉर्म शुरू हो जाएगा। इस संबंध में राज्य स्तर के सभी अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। अब आगे जिलों में भी आईडीएसपी से जुड़े अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ऐप के जरिए एएनएम आदि को तुरंत ही मिलने वाले सभी मरीजों का डाटा ऑनलाइन फीड करना होगा। इसमें खास बात यह होगी कि यदि किसी गांव बस्ती में अचानक डायरिया, डेंगू, मलेरिया, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के मरीज बड़ी संख्या में यदि अस्पतालों में भर्ती होंगे, तो इसकी सूचना राज्य स्तर के स्वास्थ्य महकमें से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक सीधे पहुंचेगी। यानी अब उप स्वास्थ्य केंद्र से लेकर मेडिकल कॉलेज में आने वाले हर मरीज की बीमारी के लक्षणों का पूरा विवरण ऑनलाइन एक प्लेटफार्म पर संधारित किया जाएगा।

ऑनलाइन बिजली बिल भुगतान की सुविधा एक अप्रैल से
अब बिजली बिल का भुगतान किसी भी समय कहीं से भी किया जा सकेगा। दरअसल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी आगामी एक अप्रैल से अपने कैश काउंटर बंद करने जा रही है। इसके विकल्प के तौर पर वर्तमान में चल रहे एमपी ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेंटर, एटीपी मशीन, कंपनी के पोर्टल, नेट बैंकिंग, क्रेडिट-डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, आईबीपीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड, वॉलेट, पेटीएम, गूगल पे, फोन पे एवं उपाय मोबाइल ऐप के विकल्पों द्वारा बिल भुगतान की सुविधा उपभोक्ताओं को मिलेगी। इसके अलावा चिन्हित स्थानों पर चयनित एजेंसियों को भी आॅनलाइन भुगतान के लिए अधिकृत किया जाएगा। यानी बिल भुगतान के लिए लोगों को बिजली आॅफिस नहीं जाना पड़ेगा। इससे उपभोक्ताओं के समय की भी बचत होगी।

नेताजी मंत्रिमंडल में शामिल हों तो इनका भी इंतजार हो खत्म
राजधानी से सटे जिलों में पदस्थ पुलिस विभाग के कई निरीक्षक और उपनिरीक्षक इस बात की वाट जोर रहे हैं कि कब नेताजी मंत्रिमंडल में शामिल हों तो उनका इंतजार खत्म हो और वे भी राजधानी लौट सकें। दरअसल पिछली बीजेपी की सरकार में जब नेताजी मंत्री थे तब उन्होंने राजधानी से सटे अपने क्षेत्र के जिलों में इन अफसरों की पोस्टिंग अपने मनमाफिक करा ली थी। वहां तक तो तक तो ठीक लेकिन उसके बाद सत्ता कांग्रेस आ गई और ये अफसर वहीं अटके रहे लेकिन अब फिर भाजपा की सरकार तो बनीं लेकिन नेताजी मंत्री नहीं बन पाए। अब ये अफसर इसी इंतजार में हैं कि कब नेताजी मंत्री बनें तो उनकी अपने परिजनों के पास राजधानी लौटने की बात बन सके। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं दिख रही।

कहां जाती है पुलिस को हर साल मिलने वाली सत्कार राशि!
पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं को हर साल सत्कार राशि के रूप में तीस हजार रुपए मिलते हैं। लेकिन यह राशि कहां खर्च होती है इसका किसी को नहीं पता। हाल ही में  पुलिस के एक बड़े अफसर ने ही इसका खुलासा अपनी शाखा में किया है। हालांकि पुलिस की कुछ शाखाएं ऐसी है जहां प्रशिक्षण के दौरान चाय-नाश्ता पर यह राशि खर्च होती है। अजाक की शाखाओं, पीटीआरआई, महिला प्रकोष्ठ आदि में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलते हैं, जिनमें यह राशि खर्च होती है। लेकिन अन्य शाखाओं में यह सत्कार राशि कहां खर्च होती है सवाल बना हुआ है। दरअसल खुलासा करने वाले अफसर को यह सत्कार राशि मिलने का पहले पता नहीं था और वे अपनी शाखा में स्टाफ को अपने पैसे से ही चाय नाश्ता कराते थे।

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