बिहाइंड द कर्टन/प्रत्याशियों के एक जैसे नाम बिगाड़ेंगे जीत का गणित

– प्रणव बजाज

उपचुनाव

प्रत्याशियों के एक जैसे नाम बिगाड़ेंगे जीत का गणित
दमोह विधानसभा का उपचुनाव जहां भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना है वहीं प्रत्याशियों के एक जैसे कई नामों की वजह से वोटरों में भी गफलत बनी हुई है। दमोह उपचुनाव में नामांकन वापसी के बाद कुल 22 उम्मीदवार मैदान में है। जिसमें अजय नाम से चार राहुल नाम से चार और दो महिला समेत कुल 22 कैंडिडेट मैदान में है। उपचुनाव में इस बार कुल 16 निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं। कुछ निर्दलीय ऐसे हैं जिनकी अपने इलाके में पकड़ मजबूत है लेकिन यह कैंडिडेट के तौर पर उतरे उम्मीदवार भाजपा और कांग्रेस का गणित बिगाड़ने की कोशिश करेंगे। एक जैसे नाम के उम्मीदवारों पर नजर डालें तो कांग्रेस से अजय कुमार टंडन निर्दलीय उम्मीदवार अजय भैया, निर्दलीय अजय भैया ठाकुर और निर्दलीय अजय का नाम शामिल है। इसी तरीके से भाजपा उम्मीदवार राहुल सिंह के नाम वाले चार उम्मीदवार राहुल भैया, राहुल भैया और राहुल एस मैदान में है।

महिला सदस्य होने से और सशक्त होगा पिछड़ा वर्ग आयोग
मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में अब कम से कम एक महिला सदस्य का होना जरूरी किया गया है। सदस्य संख्या भी अब तीन के बजाय पांच रहेगी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसी के साथ संशोधन लागू हो गए हैं। दरअसल बजट सत्र में राज्य सरकार ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया था। सरकार का तर्क है कि पिछड़ा वर्ग आयोग को बहुमुखी बनाने और आयोग में पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए संशोधन किए गए हैं। इसी के साथ ही आयोग के कार्यों में बढ़ोतरी की जाएगी तथा  नीति विषयक मामलों में भी आयोग की सलाह ली जाएगी।

दमोह में मतदाताओं की खामोशी बढ़ा रही प्रत्याशियों की धड़कनें
दमोह उपचुनाव में मतदान के लिए अभी 9 दिन बाकी हैं लेकिन चुनावी पारा आसमान पर चढ़ने लगा है। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में भाजपा-कांग्रेस समर्थक मतदाताओं की नब्ज टटोलने के साथ उनको अपने पक्ष में करने के लिए जमकर जतन करते नजर आ रहे हैं। वहीं मतदाता भी चतुर खिलाड़ी की तरह कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ नजरें मारकर दोनों दलों के नेताओं को आशान्वित किए हुए हैं लेकिन वादा किसी से नहीं है। यही वजह है कि मतदाताओं की खामोशी से प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। जहां भाजपा ने जीत के लिए तगड़ी रणनीति बनाई है वहीं बुधवार को कमलनाथ को तपती दोपहर की धूप में सुनने के लिए उमड़ी ग्रामीणों की भीड़ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि गांव वालों को अभी कमलनाथ से और कमलनाथ को अभी गांव वालों से काफी आशा और उम्मीद बाकी है लेकिन इस आशा और उम्मीद को वोट में तब्दील करना इतना आसान भी नहीं होगा।

वर्ग आरक्षण करने से प्रभावित होंगे 162 नगरीय निकाय
रोटेशन पर वर्ग आरक्षण करने पर प्रदेश के 162 नगरीय निकाय चुनाव प्रभावित होंगे। इन निकायों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही चुनाव हो पाएंगे। क्योंकि जिन 81 निकायों में एसटी-एससी के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं, उन्हें पहले सरकार को इससे मुक्त कर सामान्य सीटें करना होगा। इसके बाद 81 निकायों को एसटी-एससी के लिए लॉटरी सिस्टम से आरक्षित करना होगा। बता दें कि इसमें कई बड़े नेताओं के हित भी प्रभावित होंगे जिसके चलते इस प्रक्रिया पर और ज्यादा समय लगेगा। सुप्रीम कोर्ट सरकार को कह चुकी है कि संविधान में रोटेशन के आधार पर सीटें रिजर्व करने का प्रावधान है। वहीं पंचायत की जो सीटें एक बार एसटी-एससी के लिए आरक्षित की जाती है उन्हें पांच साल बाद बदल दिया जाता है। इसी तरह से निकाय चुनाव में प्रक्रिया अपनाने के लिए हाईकोर्ट ग्वालियर ने कहा है।

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