अब एनपी लापता…!

प्रणव बजाज
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में इन दिनों जगजीत सिंह की गजल की ये पंक्तियां खूब छाई हुई हैं कि-चि_ी ना कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए…. दरअसल यहां के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति वैश्विक बीमारी के दौर में इन दिनों क्षेत्र से गायब हैं…उनके नाम से इस तरह की पंक्ति लिखी पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं… गुमशुदा की तलाश लापता है… मप्र के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद यानी एनपी प्रजापति… ये हम नहीं कह रहे बल्कि ये वो पोस्टर कह रहा है…. जो इन दिनों एनपी प्रजापति के विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव के व्हाट्सएप ग्रुप में ग्रुप और दूसरे सोशल मीडिया परं चर्चित हो रहा है… दरअसल अपनी सरकार गिरने के बाद से एनपी जब क्षेत्र में नजर नहीं आए…तो लोगों ने इस तरह के पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए…इसके पहले कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के लापता होने के पोस्टर-पर्चे भी उनके क्षेत्रों में लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए थे…जब नेता कोरोना महामारी जैसे विपत्तिकाल में अपने क्षेत्र की उस जनता की सुध नहीं लेंगे…जिसने उसे वैभव से नवाजा है…तो यह सब तो होगा ही…।


शिवराज का अंदाज
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बेहद विनम्र और संजीदा राजनेता कहा जाता है…उनके बारे में कहा जाता है कि वे प्राय: व्यक्तिगत विवादों से बचते हैं…और अनर्गल प्रलाप करना उनकी आदत में नहीं है…लेकिन जब कोई उनकी सरकार पर बेवजह मिथ्या आरोप लगाए, तो सबसे पहले यदि किसी की प्रतिक्रिया सामने आती है, तो शिवराज हैं…अब देखिए ना…आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं…और मध्यप्रदेश कांगे्रेस के नेता सत्ता खोने से बौखलाए हुए हैं…लेकिन उपचुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर दोबारा सत्ता में लौटने के सपने देख रहे हैं…इसीलिए शिवराज सरकार को ऐसे-वैसे-तैसे घेरने और गरियाने में लग गए हैं…हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जब कहा कि यह तो इंटरवल है, पिक्चर अभी बाकी है…और उपचुनाव में कांग्रेस 24 सीटों में से 20 से 22 सीटें जीत रही है…नाथ ने यह दावा किया ही था कि शिवराज ने अपने अंदाज में कुछ इस तरह जवाब दिया कि….कमलनाथजी दिल को बहलाने के गालिब ख्याल अच्छा है…मध्यप्रदेश को तबाह और बर्बाद करने वाले और भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने वाले, यदि इस तरह से उपचुनाव जीतने का दावा करें तो हंसी के अलावा और क्या आएगा…शिवराज को क्या… किसी को भी नाथ के दावे पर हंसी आना स्वभाविक है…क्योंकि वे किला ढहने के बाद…उसे दोबारा खड़ा करने की बात कर रहे हैं…फिर राजनीति में कब क्या हो जाए…कुछ कहा नहीं जा सकता है…।


नए इश्यू को हवा देने के मायने
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय देश के उन राजनेताओं में से हैं…जो अपने बयानों के वजह से आए दिन चर्चाओं में रहते आए हैं…उनके हर कथन और कथोपकथन के पीछे कोई न कोई राजनीतिक दूरदेंशी होती है…हाल ही में जब उन्होंने ट्वीटर के जरिए मदरसों की सरकारी मदद और अनुच्छेद पर सवाल उठाया तो, देशभर में राजनीतिक बवाल मच गया…उन्होंने ट्वीटर पर लिखा कि देश में संवैधानिक समानता के अधिकार को आर्टिकल 30 सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचा रहा है… ये अल्पसंख्यकों को धार्मिक प्रचार और धर्म शिक्षा की इजाजत देता है, जो दूसरे धर्मों को नहीं मिलती… जब हमारा देश धर्मनिरपेक्षता का पक्षधर है, तो आर्टिकल 30′ की क्या जरुरत है…इस नए इश्यू को हवा देने के पीछे कैलाश के पेट में क्या है, यह तो कोई नहीं जानता…लेकिन राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि कैलाश ट्वीट के जरिए परोक्ष रूप से अनुच्छेद 30 की आड़ में देश के बहुसंख्यक समाज के साथ धार्मिक भेदभाव क्यों किया जा रहा है…यह इश्यू उठाना चाहते हैं…और उनके इस ट्वीट को एक तरह से अनुच्छेद 30 हटाओ मुहिम का ही हिस्सा कह सकते हैं…यदि ऐसा है तो भाजपा का यह अल्पसंख्यकों को लेकर कोई नया राजनीतिक गेम प्लान है…वरना उनके कथन को संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के भाव से देखें तो यह भाजपा का हिंदू कार्ड नहीं है तो क्या है…।


एक और कृषि कर्मण अवार्ड की ओर
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को गेहूं-दलहन के उत्पादन के लिए लगातार सात-सात कृषि कर्मण अवार्ड तो मिल चुके हैं…लगता है अब उसका लक्ष्य एक और कृषि कर्मण हासिल करने की ओर है…वो भी तब कोरोना संकट में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट पड़ी हुई है…इसके लिए शिवराज सरकार कृषि को ही मुख्य आधार बनाने जा रही है… और खरीफ फसलों की ज्यादा से ज्यादा बोवनी की रणनीति बना रही है… इस बार सरकार ने रिकॉर्ड 138 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन,धान, मक्का, उड़द, तुअर, मूंग की बोवनी का लक्ष्य रखा है…इसके साथ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को कैसे बढ़ाया दिया जाए…इसका प्लान बना रही है…यह सब माथापच्ची के पीछे सरकार का मकसद संभवत: यही है किसानों के हाथों में रूपया रहे…मध्यप्रदेश का बाजार फलीभूत हो…और कृषि कर्मण हासिल करने का जो गौरव मध्यप्रदेश को मिला हुआ है…वह जस का तस बरकरार रहे…अब देखना है कि राज्य सरकार अपने इस लक्ष्य को पाने कामयाब होती है या नहीं…पर सरकार की कोशिशों की सराहना तो होनी चाहिए…।

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