छत्तीसगढ़ में धान की खुशबू हाथियों को खेतों की ओर कर रही आकर्षित


धान की खुशबू हाथियों को इतनी आकर्षित करती है कि वे जंगल में उपलब्ध चारा के बजाय इस सीजन धान खाना ज्यादा पसंद करते है।
अंबिकापुर, बिच्छू डॉट कॉम।
जंगली हाथियों से सर्वाधिक प्रभावित उत्तरी छत्तीसगढ़ में इन दिनों खेतों में लहलहाती धान के फसल की खुशबू हाथियों को आकर्षित कर रही है। हाथियों के समक्ष भोजन को लेकर कोई संघर्ष नहीं है। हाथी ऐसे जंगलों में पहुंच चुके हैं, जहां से धान के खेत नजदीक हैं। सरगुजा,सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर और कोरिया जिले के दूरस्थ गांवों में आज भी किसान हाइब्रिड धान के बजाय परंपरागत सुंगधित धान की खेती करते है। धान की खुशबू हाथियों को इतनी आकर्षित करती है कि वे जंगल में उपलब्ध चारा के बजाय इस सीजन धान खाना ज्यादा पसंद करते है। हाथियों का संघर्ष सिर्फ भोजन को लेकर होता है। वर्तमान में खेतों में लहलहाती फसल हाथियों के व्यवहार में भी बदलाव ला चुकी है। भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों के साथ लंबे समय तक हाथियों के व्यवहार पर अध्ययन करने वाले प्रभात दुबे बताते है कि वर्तमान सीजन में हाथी यदि धान के खेतों में उतर गए तो उन्हें भगाना संभव ही नहीं होता है।
सारे उपाय हाथियों के आगे फेल हो जाते है। इस सीजन में हाथियों का व्यवहार भी बदला हुआ है। अध्ययन से पता चला है कि हाथी का गुस्सा भी दो प्रकार का होता है। अभी उनकी आक्रामकता कम हो जाती है। अभी हाथी गुस्सा भी सिर्फ इंसानों को डराने के लिए करते है। यदि एकदम आमना-सामना हो गया तब ही जनहानि हो सकती है अन्यथा हाथी किसी इंसान को अभी दौड़ा कर नहीं मारता है।उनका कहना है कि इसी सीजन में हाथी को पर्याप्त आहार मिलता है।हाथी एक ऐसा वन्य प्राणी है कि इसका पाचन सिस्टम ठीक नहीं होता।कई जानवर जुगाली करते है लेकिन हाथी के साथ ऐसा नहीं है।हाथी जितना भी आहार ले उसका तीस फीसद ही पच पाता है।
जल्दी जंगल से निकल देर तक रहते है खेतों में
अमूमन इंसानी हलचल समाप्त होने के बाद रात 9-10 बजे जंगल से निकलने वाले हाथी इन दिनों शाम चार बजे ही जंगल से निकलकर धान के खेतों में घुस रहे हैं। अलसुबह छह बजे तक हाथियों को जंगल किनारे खेतों में देखा जा सकता है। नवंबर महीने तक परिस्थिति लगभग यही रहेगी।

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