सोच से जुदा है ईरान की जिंदगी…

बिच्छू डॉट कॉम, डेस्क। वास्तव में ईरान हमारी और आपकी कल्पना से एकदम अलग देश है। जैसा दिखाया जाता है वैसा नहीं है ईरान। वहां भी आजादी है, हंसी है, खुशी है और जिंदगी जीने वाले जिंदादिल लोग हैं। ईरान में रह रहे लोगों की लाइफस्टाइल उस धारणा से बिल्कुल दूर है, जो यहां के कट्टरपंथियों ने दुनिया को दिखाने की कोशिश की है। बाकी देशों की तरह जुर्म और हिंसा यहां रोजाना की जिंदगी का सच है, लेकिन कुल मिलाकर ईरान एक ऐसा देश है, जो कट्टर परंपरा और आधुनिक संवेदनशीलता के बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में लगा है।

अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान को छोड़कर एक नया मार्ग खोलने के प्रयासों के तहत प्रधानमंत्री ईरान यात्रा के दौरान चाबहार बंदरगाह के पहले चरण के विकास के लिए उसके साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करेंगे। मोदी की शिया मुसलमानों के देश ईरान की यह पहली यात्रा है। ईरान का नाम जेहन में आते ही एक ऐसे इस्लामिक देश की छवि उभरती है, जहां नियम-कायदे बहुत सख्त हैं। हालांकि, इस छवि के पीछे काफी हद तक ईरान और अमेरिका के कट्टरपंथी हैं।

इन्होंने ईरान की ऐसी छवि दिखाने की कोशिश की, जो पश्चिमी सभ्यता और आधुनिकता का विरोध करती है। इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में काफी बदलाव आया है, लेकिन फिर भी इस देश की असल तस्वीर इस राजनीतिक दिखावे से काफी अलग है। ईरान में रह रहे लोगों की लाइफस्टाइल उस धारणा से बिल्कुल दूर है, जो यहां के कट्टरपंथियों ने दुनिया को दिखाने की कोशिश की है। बाकी देशों की तरह जुर्म और हिंसा यहां रोजाना की जिंदगी का सच है, लेकिन कुल मिलाकर ईरान एक ऐसा देश है, जो कट्टर परंपरा और आधुनिक संवेदनशीलता के बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में लगा है। इस कोशिश का सबसे ज्यादा असर ईरान की सांस्कृतिक और औद्योगिक राजधानी तेहरान में देखने को मिलता है। यहां के लोगों की जिंदगी अन्य देशों के लोगों की ही तरह एकदम सामान्य है, बात चाहे पहनावे की हो या फिर अपने शौक पूरे करने की। महिलाएं और लड़कियां बराबरी में यहां बाहर काम करती दिखाई दे जाएंगी। महिलाओं को जिम से लेकर हुक्का बार और पार्टीज में आसानी से देखा जा सकता है। जाहिर है किसी भी देश के बारे में कोई भी राय वहां की सरकार और वहां के राजनीतिक परिदृश्य को देखकर नहीं बनानी चाहिए।

उतनी बंदिशें नहीं
ईरान के राजनेताओं और मौलाना मौलवियों को टीवी या इंटरनेट पर बोलते देख लगता है कि ईरान में भी और इस्लामिक देशों की तरह हर चीज बैन होगी लेकिन ऐसा नहीं है। यहां हर वो चीज है जो किसी और देश में होती है। शराब, नाईट क्लब, हसीनाएं और आजादी। ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद हालात काफी बदले हैं लेकिन फिर भी ईरान में उतनी बंदिशें नहीं हैं। ईरान की राजधानी तेहरान किसी पश्चिमी देश से कम नहीं है। नाईट क्लब, शराब, जगमगाती लाइट्स सब कुछ है तेहरान में। कभी तेहरान में जाकर देखिये वहां के निगह क्लब,वहां का संगीत और वहां की हसीनाएं देखकर आप पेरिस और लास वेगास को भी भूल जाएंगे। फैशन की दुनिया में भी ईरानी मॉडल्स का काफी नाम है। यह मत सोचिये कि ये मॉडल्स हिजाब पहन कर रैंप पर आती हैं। रैंप पर इनके जलवे ही कुछ और होते हैं।

महिलाओं की लड़ाई
ईरान की महिलाएं न सिर्फ खूबसूरती में सबसे आगे हैं अपितु अपने अधिकारों के लिए लडऩे में भी आगे हैं। क्रांति के बाद महिला राजनीतिज्ञों की संख्या में कमी तो आई है पर आज भी इनका राजनीति में पूरा दखल है। ईरान में महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी है और विरोध प्रदर्शन का भी। समय समय पर सरकार के ऊल जुलूल फैसलों पर यहां की महिलाएं अपने अपने तरीके से विरोध प्रदर्शन करती हैं। मिसीह एलीनेजाद ईरानी महिला पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। महिलाओं के अधिकार को ले कर ईरान में इन्होंने एक अलग ही तरह का विद्रोह छेड़ रखा है। 1979 से ईरान में महिलाओं के लिए पब्लिक में हिजाब पहनना अनिवार्य है। इसको न पहनने पर यहां कानूनी कार्रवाई की जाती है। 2009 में ईरान की लगभग 30 लाख महिलाओं पर या तो मुकदमे चलाए गए या जुर्माना लगा। इसे ले कर एक तरह से लोगों में विद्रोह की आग धीरे-धीरे सुलग रही है। लेकिन रूढि़वादी लोगों की सोच भी इसमें आड़े आ रही है। ईरान में बिना हिजाब के महिलाओं का घूमना एक तरह से अपवाद ही है, लेकिन मिसीह एलीनेजाद जैसी कुछ बहादुर महिलाओं ने इस अपवाद को नकार के रख दिया।

युवाओं में हुक्का
हुक्का वैसे तो बहुत समय से ईरान और अन्य एशियाई देशों में इस्तेमाल किया जाता है। आजकल ईरान में हुक्का यहां के युवा वर्ग की पहली पसंद बन गया है। तेहरान सहित कई अन्य शहरों में आप हुक्का बार में यहां के युवाओं को हुक्के का लुत्फ उठाते देख सकते हैं। ईरान की खूबसूरती किसी के भी दिल को जीत सकती है। इराक, तुर्कमेनिस्तान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से घिरा हुआ ये देश इरान आए-दिन सुर्खियों में बना रहता है। पर अगर आप इस बड़े से देश की सुंदरता पर गौर करें, तो ये आपका दिल जीतने के लिए काफी है। टूरिज्म की नजर से इरान किसी के लिए भी एक मस्ट-विजिट नेशन के तौर पर देखा जा सकता है। यहां की प्राचीन इमारतें, मॉडर्न लाइफस्टाइल के बीच भी पुराना-सा अहसास और यहां की संस्कृति, सभी कुछ सुंदर है। इरान युनेस्को के 19 रेजिस्टर्ड साइटों में से एक है। इस देश में 1300 प्रोजेक्ट्स का इंवेस्टमेंट पैकेज हो रखा है। स्कीइंग के लिए इरान का नाम आपके जेहन में नहीं आता होगा।

What the world could lose in an Iran conflict

मधुर संबंधों का इतिहास
ईरान के साथ भारत के संबंध सदैव मधुर रहे हैं। ईरान और भारत का अपना साझा इतिहास भी रहा है। भारत और ईरान दोनों की प्राचीन सभ्यताएं हैं। संयुक्त भारत के विभाजन से पूर्व दोनों पड़ोसी मुल्क थे। ईरान में कई भारतीय परिवार रहते थे जो 1920 से ईरान में बस रहे थे उनमें सबसे बड़ी संख्या सिख और गुजरातियों की थी। वे 1950 से ईरान की राजधानी में आकर बसने लगे। ईरान प्राचीन सिल्क रूट का मार्ग भी है जो योरोप तक जाता है। गुरु नानक देव इसी मार्ग से मक्का गए थे। सिख इस स्थान का बहुत सम्मान करते हैं कहते हैं जब संयुक्त भारत का बंटवारा हुआ सन 1947 में जाह्दान के आसपास रहने वाले पंजाब के बाशिंदे यह नहीं जानते थे हिन्दोस्तान किधर है ईरान की सीमा उनके क्षेत्र से जुडी थी इसलिए वे वहीं बस गए और वहीं के हो गए। कहते हैं ईरान और पाकिस्तान की सीमावर्ती शहर जाह्दान का नाम एक सिख के नाम पर रखा गया था पहले इस शहर का नाम दूजद आब था। जाह्दान एक सूखा क्षेत्र है। एक बार ईरान के शाह दुजद आब प्रदेश गए वहां उन्हें एक नेक दिल सिख को सबके साथ रहते देख कर हैरानी हुई उन्होंने इस प्रदेश का नाम उस सिख के नाम पर रख दिया जिन्हें वहां के बाशिंदे जहेदस पायस कह कर पुकारते थे। अत: प्रदेश का नाम ही जाह्दान हो गया।

तेहरान में गुरुद्वारा
तेहरान में सिखों का गुरुद्वारा है। यहीं एम्बेसी का स्कूल है। यहां भारतीय बच्चे पढ़ते हैं। ईरान में सात वर्ष का बच्चा स्कूल जाता है। भारतीयों के बच्चों के लिए एम्बेसी के स्कूल के साथ गुरूद्वारे में भी क्लासेस लगती हैं। स्कूल में सीबीएसई का कोर्स पढ़ाया जाता है और परीक्षा रे पेपर भारत से जाते हैं। सिख समुदाय के लोग वहां अपने देश की तरह रहते हैं। इस समय प्रवासियों की चौथी और पांचवी पीढ़ी रहती है लेकिन अभी तक वे भारतीय नागरिक हैं। इससे ईरानियों को मिलने वाले अधिकारों से वे वंचित हैं। वे ईरान की नागरिकता चाहते हैं। वहां प्रवासियों को सम्पत्ति खरीदने का अधिकार नहीं है। व्यापार में भी निवेश करने के लिए ईरानी पार्टनर चाहिए। भारतीय कंपनियां ईरान में कोल, गैस, रेल की पटरियां बिछाने, शिपिंग और खेती बाड़ी के काम में निवेश की इच्छुक हैं जिसके अवसर भी कम नहीं हैं। तेल की कीमतें घटने के बाद ईरान अन्य क्षेत्रों में विकास के अवसर खोज रहा है।

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