भ्रष्टों को ऐसे बचाती है सरकार
ब्यूरो / बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार अपने ब्लॉग पर लिखा था कि भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे और उन्हीं के राज में भ्रष्टों को खुलेआम बचाया जा रहा है। विशेष तथ्य यह है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में एक अधिकारी आत्महत्या कर चुका है और अब तक किसी के भी खिलाफ प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। इससे शिव सरकार की कार्यप्रणाली पर फिर प्रश्न लग गया है। शिव सरकार भ्रष्टों को खुलेआम संरक्षण दे रही है। ताजा मामला खाद्य मंत्री पारस जैन और उनके पीए राजेंद्र भूतड़ा का है। जैन पर आरोप है कि उन्होंने भिण्ड में पदस्थ फूड इंस्पेक्टर अकरम खान से इंदौर तबादले के लिए 1.55 लाख रुपए पीए के मार्फत रिश्वत के बतौर लिए थे। इसके बाद उक्त फूड इंस्पेक्टर का तबादला तो हुआ, किंतु इंदौर की जगह देवास का आदेश जारी हुआ। इसके बावजूद भिंड जिला प्रशासन उन्हें रिलीव नहीं कर रहा था। इससे परेशान होकर फूड इंस्पेक्टर अकरम खान ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद मृतक की पत्नी जरीन खान ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर खुलासा किया कि खाद्य मंत्री को 1.55 लाख रुपए की रिश्वत देने के बाद भी वांछित जगह तबादला आदेश नहीं मिला। उधर भिंड जिला प्रशासन भी उन्हें प्रताडि़त करता रहा। इस कारण उनके प्रति को आत्महत्या करना पड़ी। इस मामले में पारस जैन ने सफाई दी कि अकरम खान दस साल से भिंड में पदस्थ थे। इस कारण उनका बतादला किया गया। जबकि सच्चाई यह है कि बीते दस साल में उनके दो तबादले किए गए थे। भिंड में 2005 में पद स्थापना के पहले वे नरसिंहपुर में पदस्थ थे, जहां से मात्र चार माह बाद ही उनका तबादला कर दिया गया था। मंत्री का यह झूठ सामने आने के बाद सरकार ने उनके पीए राजेंद्र भूतड़ा की सेवाएं उनके मूल विभाग पॉलीटेक्निक कॉलेज को लौटा दी। सवाल यह है कि जब सरकार पीए को दोषी मान रही है तो मंत्री को क्यों बख्शा जा रहा है? मामले में होना तो यह चाहिए था कि मंत्री को बर्खास्त कर उनके साथ-साथ उनके पीए पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। किंतु सरकार लीपापोती करने में जुटी है।
भोपाल (डीएनएन)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार अपने ब्लॉग पर लिखा था कि भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे और उन्हीं के राज में भ्रष्टों को खुलेआम बचाया जा रहा है। विशेष तथ्य यह है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में एक अधिकारी आत्महत्या कर चुका है और अब तक किसी के भी खिलाफ प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। इससे शिव सरकार की कार्यप्रणाली पर फिर प्रश्न लग गया है। शिव सरकार भ्रष्टों को खुलेआम संरक्षण दे रही है। ताजा मामला खाद्य मंत्री पारस जैन और उनके पीए राजेंद्र भूतड़ा का है। जैन पर आरोप है कि उन्होंने भिण्ड में पदस्थ फूड इंस्पेक्टर अकरम खान से इंदौर तबादले के लिए 1.55 लाख रुपए पीए के मार्फत रिश्वत के बतौर लिए थे। इसके बाद उक्त फूड इंस्पेक्टर का तबादला तो हुआ, किंतु इंदौर की जगह देवास का आदेश जारी हुआ। इसके बावजूद भिंड जिला प्रशासन उन्हें रिलीव नहीं कर रहा था। इससे परेशान होकर फूड इंस्पेक्टर अकरम खान ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद मृतक की पत्नी जरीन खान ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर खुलासा किया कि खाद्य मंत्री को 1.55 लाख रुपए की रिश्वत देने के बाद भी वांछित जगह तबादला आदेश नहीं मिला। उधर भिंड जिला प्रशासन भी उन्हें प्रताडि़त करता रहा। इस कारण उनके प्रति को आत्महत्या करना पड़ी। इस मामले में पारस जैन ने सफाई दी कि अकरम खान दस साल से भिंड में पदस्थ थे। इस कारण उनका बतादला किया गया। जबकि सच्चाई यह है कि बीते दस साल में उनके दो तबादले किए गए थे। भिंड में 2005 में पद स्थापना के पहले वे नरसिंहपुर में पदस्थ थे, जहां से मात्र चार माह बाद ही उनका तबादला कर दिया गया था। मंत्री का यह झूठ सामने आने के बाद सरकार ने उनके पीए राजेंद्र भूतड़ा की सेवाएं उनके मूल विभाग पॉलीटेक्निक कॉलेज को लौटा दी। सवाल यह है कि जब सरकार पीए को दोषी मान रही है तो मंत्री को क्यों बख्शा जा रहा है? मामले में होना तो यह चाहिए था कि मंत्री को बर्खास्त कर उनके साथ-साथ उनके पीए पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। किंतु सरकार लीपापोती करने में जुटी है।
Rate this article



del.icio.us
Digg