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गणवेश मेलों का फर्जीवाड़ा

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इरफान जाफरी/ बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्राओं को दिए जाने वाले गणवेश खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें चंद व्यापारियों को उपकृत करने के लिए प्रमाणपत्र का फर्जीवाड़ा किया गया, जिससे प्रदेशभर के व्यापारी गणवेश मेलों में शिरकत नहीं कर सके। यह मामला प्रकाश में लाए जाने के बाद स्कूली शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस और विभागीय आयुक्त मनोज झालानी मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं।
राज्य शासन के आदेशानुसार स्कूली शिक्षा विभाग तथा राज्य शिक्षा केंद्र ने गणवेश वितरण संबंधी गाइडलाइन तय की, जिसका प्रकाशन 23 जून 2010 को अखबारों में किया गया। तय गाइडलाइन के अनुसार गणवेश मेलों में भाग लेने के लिए व्यापारियों को राज्य शिक्षा केंद्र के भोपाल कार्यालय में पंजीयन करना अनिवार्य था, जिसकी अंतिम तिथि 25 जून 2010 तक थी। पंजीयन कराने से पूर्व संबंधित व्यापारियों को पॉवरलूम सेवा केंद्र, बुरहानपुर से गुणवत्ता प्रमाणपत्र लेना भी अनिवार्य था। व्यापारियों से गुणवत्ता प्रमाण पत्र लेना भी अनिवार्य था। व्यापारियों ने इतने कम समय में उक्त प्रमाणपत्र लाने की अनिवार्यता का विरोध किया, तो पंजीयन की तारीख बढ़ा कर 10 जुलाई तक कर दी गई, किंतु इसके साथ यह शर्त भी जोड़ दी गई कि 25 जून 2010 तक जारी प्रमाणपत्र ही मान्य किए जाएंगे। स्कूली शिक्षा विभाग और राज्य शिक्षा केंद्र की इस हठधर्मिता के कारण मात्र 27 व्यापारियों का ही पंजीयन हो सका, जबकि पहले सैकड़ों व्यापारी गणवेश मेले में भाग लेते थे। खास बात यह है कि इनमें भाग लेने वाले व्यापारियों ने 17-18 जून को ही उक्त गुणवत्ता प्रमाणपत्र बनवा लिए थे। ऐसे में यह प्रश्न सहज ही उठता है कि जब विज्ञापन का प्रकाशन 23 जून को किया गया था, तो चंद व्यापारियों ने 17-18 जून को ही गुणवत्ता प्रमाणपत्र किसके कहने पर बनवा लिए थे? जाहिर है कि विज्ञापन प्रकाशन कागजी कार्रवाई थी और विभागीय अधिकारियों ने चंद व्यापारियों से पहले ही साठगांठ कर ली थी। विदिशा व्यापार संघ के अध्यक्ष सुरेश मोतियानी और महामंत्री चंद्रकांत जैन के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधि मंडल ने जब स्कूली शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस और विभागीय आयुक्त मनोज झालानी से जब इस बाबत सवाल किए तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। गौरतलब है कि स्कूली शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस बुरहानपुर निवासी हैं और अपने गृहनगर के पॉवरलूम सेवा केंद्र को उनके निर्देश पर ही गुणवत्ता प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

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