बे-असरताज
गौरव चतुर्वेदी / बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। वनमंत्री सरताज सिंह जंगल विभाग के अफसरों पर बे-असर होते जा रहे हैं। न तो अफसर वन मंत्री के मौखिक आदेश को मानते हैं और न ही लिखित आदेशों को तवज्जो दे रहे हैं। अपनी इस उपेक्षा से त्रस्त आकर सरताज अफसरों को यहां तक कह गए कि दिए गए आदेशों का तत्काल पालन करें और अगर आदेशों का पालन नहीं कर सकते हैं तो तत्काल मना करें।
हाल ही में संपन्न एक समीक्षा बैठक में सरताज सिंह ने विभाग के अफसरों की जमकर लू उतारी। बैठक में दो मुद्दों पर अफसरों का रुख सरताज के बे-असर होने की कहानी बयां कर रहा है। बांस वर्ष मनाने का निर्णय नवंबर 2009 में लिया गया था। अभी तक विभाग ने कोई तैयारी नहीं की है। फील्ड में हालत तो और उलट है। आदेश निचले स्तर पर तक भेजे ही नहीं गए हैं। मंत्री द्वारा अफसरों को बार-बार चेताया जा रहा है। दूसरा मामला जलाऊ वन और चारागाह और बांस के लिए उपलब्ध बजट का है। मंत्री बजट की जानकारी मांग रहे हैं, जो बार-बार मांगने के बाद भी अफसरों द्वारा आज तक उलपब्ध नहीं कराई गई है। जिससे तंग आकर सरताज सिंह अफसरों को कह गए कि मौखिक निर्देशों का तत्काल पालन करें अन्यथा असहमति व्यक्त करें। मंत्री के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि जब मंत्री द्वारा आदेश के पालन का पूछा जाता है तो अफसर या तो भ्रम उत्पन्न कर देते हैं या मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
भोपाल (डीएनएन)। वनमंत्री सरताज सिंह जंगल विभाग के अफसरों पर बे-असर होते जा रहे हैं। न तो अफसर वन मंत्री के मौखिक आदेश को मानते हैं और न ही लिखित आदेशों को तवज्जो दे रहे हैं। अपनी इस उपेक्षा से त्रस्त आकर सरताज अफसरों को यहां तक कह गए कि दिए गए आदेशों का तत्काल पालन करें और अगर आदेशों का पालन नहीं कर सकते हैं तो तत्काल मना करें।
हाल ही में संपन्न एक समीक्षा बैठक में सरताज सिंह ने विभाग के अफसरों की जमकर लू उतारी। बैठक में दो मुद्दों पर अफसरों का रुख सरताज के बे-असर होने की कहानी बयां कर रहा है। बांस वर्ष मनाने का निर्णय नवंबर 2009 में लिया गया था। अभी तक विभाग ने कोई तैयारी नहीं की है। फील्ड में हालत तो और उलट है। आदेश निचले स्तर पर तक भेजे ही नहीं गए हैं। मंत्री द्वारा अफसरों को बार-बार चेताया जा रहा है। दूसरा मामला जलाऊ वन और चारागाह और बांस के लिए उपलब्ध बजट का है। मंत्री बजट की जानकारी मांग रहे हैं, जो बार-बार मांगने के बाद भी अफसरों द्वारा आज तक उलपब्ध नहीं कराई गई है। जिससे तंग आकर सरताज सिंह अफसरों को कह गए कि मौखिक निर्देशों का तत्काल पालन करें अन्यथा असहमति व्यक्त करें। मंत्री के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि जब मंत्री द्वारा आदेश के पालन का पूछा जाता है तो अफसर या तो भ्रम उत्पन्न कर देते हैं या मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
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