स्कूली शिक्षा विभाग का एक और कारनामा
- नौनिहालों को गलत शिक्षा। - पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सही जानकारी नहीं।
- नौनिहालों को गलत शिक्षा।
- पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सही जानकारी नहीं।
- पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सही जानकारी नहीं।
ब्यूरो/बिच्छू डॉट काम
भोपाल (डीएनएन)। निकट भविष्य में यदि आज स्कूली बच्चों से यह पूछें कि उनके प्रदेश में कितने जिले हैं और गलत उत्तर दें तो उन्हें दोष देने की जरूरत नहीं है। इसके लिए सीधे-सीधे राज्य सरकार जिम्मेदार है, क्योंकि उसकी पाठ्यपुस्तकों में ही गलत जानकारी परोसी गई है।
वर्तमान में प्रदेश में 50 जिले हैं, अलीराजपुर, सिंगरौली, अनूपपुर, अशोक नगर और बुरहानपुर को जिलों का दर्जा 2005 से 2008 के बीच दिया गया है। लेकिन पाठ्यपुस्तक निगम की पुस्तकों में इन जिलों का उल्लेख नहीं है और प्रदेश में कुल 45 जिले ही बताए गए हैं। यह जानकारी जब मीडियाकर्मियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दी तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि वे यह मामला देखेंगे।
राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा पाठ्यपुस्तक निगम के माध्यम से प्रकाशित कक्षा 5वीं की पर्यावरण अध्ययन पुस्तक के अध्याय 17 में मध्यप्रदेश में परिवहन नामक पाठ में उपरोक्त पांच जिलों का कहीं भी जिक्र नहीं है। इस पाठ में राज्य के जिले और राष्ट्रीय राजमार्ग वर्ष 2007 के अनुसार है। इस संबंध में एक पुस्तक विक्रेता ने बताया कि यह पुस्तक पहली बार वर्ष 2007 में प्रकाशित की गई थी। उसके बाद इस हर साल प्रकाशित किया जाता रहा, किंतु नई जानकारी समावेशित करने की जरूरत नहीं समझी गई, यही कारण है कि इस पुस्तक में नए बने पांच जिलों का जिक्र नहीं है। हालांकि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह नई जानकारी पुस्तकों में दें, किंतु लापरवाह अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के पाठ 6 पृथ्वी और नक्शे में जो राजनीतिक नक्शा दर्शाया गया है, उसमें सिंगरौली और अलीराजपुर जिले का कहीं जिक्र नहीं है। यह पुस्तक वर्ष 2006 से मुद्रित की जा रही है और इसे 'अपडेट' करने की कोशिश नहीं की गई। खास बात यह है कि गलत जानकारी प्रस्तुत करने वाली ये पुस्तकें उस मप्र पाठ्यपुस्तक स्टेंडिंग कमेटी की पहल पर प्रकाशित की जाती है, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अफसर भी शामिल हैं। इसमें से किसी भी अफसर ने पुस्तकों के पुनर्मुद्रण के समय उसमें नई जानकारी शामिल करने पर ध्यान नहीं दिया। इस कारण नौनिहाल गलत शिक्षा ले रहे हैं, जिसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार हैं।
भोपाल (डीएनएन)। निकट भविष्य में यदि आज स्कूली बच्चों से यह पूछें कि उनके प्रदेश में कितने जिले हैं और गलत उत्तर दें तो उन्हें दोष देने की जरूरत नहीं है। इसके लिए सीधे-सीधे राज्य सरकार जिम्मेदार है, क्योंकि उसकी पाठ्यपुस्तकों में ही गलत जानकारी परोसी गई है।
वर्तमान में प्रदेश में 50 जिले हैं, अलीराजपुर, सिंगरौली, अनूपपुर, अशोक नगर और बुरहानपुर को जिलों का दर्जा 2005 से 2008 के बीच दिया गया है। लेकिन पाठ्यपुस्तक निगम की पुस्तकों में इन जिलों का उल्लेख नहीं है और प्रदेश में कुल 45 जिले ही बताए गए हैं। यह जानकारी जब मीडियाकर्मियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दी तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि वे यह मामला देखेंगे।
राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा पाठ्यपुस्तक निगम के माध्यम से प्रकाशित कक्षा 5वीं की पर्यावरण अध्ययन पुस्तक के अध्याय 17 में मध्यप्रदेश में परिवहन नामक पाठ में उपरोक्त पांच जिलों का कहीं भी जिक्र नहीं है। इस पाठ में राज्य के जिले और राष्ट्रीय राजमार्ग वर्ष 2007 के अनुसार है। इस संबंध में एक पुस्तक विक्रेता ने बताया कि यह पुस्तक पहली बार वर्ष 2007 में प्रकाशित की गई थी। उसके बाद इस हर साल प्रकाशित किया जाता रहा, किंतु नई जानकारी समावेशित करने की जरूरत नहीं समझी गई, यही कारण है कि इस पुस्तक में नए बने पांच जिलों का जिक्र नहीं है। हालांकि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह नई जानकारी पुस्तकों में दें, किंतु लापरवाह अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के पाठ 6 पृथ्वी और नक्शे में जो राजनीतिक नक्शा दर्शाया गया है, उसमें सिंगरौली और अलीराजपुर जिले का कहीं जिक्र नहीं है। यह पुस्तक वर्ष 2006 से मुद्रित की जा रही है और इसे 'अपडेट' करने की कोशिश नहीं की गई। खास बात यह है कि गलत जानकारी प्रस्तुत करने वाली ये पुस्तकें उस मप्र पाठ्यपुस्तक स्टेंडिंग कमेटी की पहल पर प्रकाशित की जाती है, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अफसर भी शामिल हैं। इसमें से किसी भी अफसर ने पुस्तकों के पुनर्मुद्रण के समय उसमें नई जानकारी शामिल करने पर ध्यान नहीं दिया। इस कारण नौनिहाल गलत शिक्षा ले रहे हैं, जिसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार हैं।
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