अफसरान के आगे नतमस्तक सरकार
- जीएडी नियमों की धज्जियां उड़ी। - पांच-पांच साल से एक ही जगह जमे हैं अफसरान।
विशेष संवाददाता / बिच्छू डॉट काम
भोपाल (डीएनएन)। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के नियमानुसार कोई भी अधिकारी एक ही विभाग में तीन साल से अधिक समय तक पदस्थ नहीं रह सकता, किंतु राज्य मंत्रालय में ही इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आयकर छापे से सुर्खियों में आए आईएएस अफसर अरविंद जोशी जल संसाधन विभाग में पांच साल से जमे थे। यदि आयकर विभाग उनके यहां छापा नहीं मारता तो उनका निलंबन तो होता ही नहीं और वे प्रमुख सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी जमे रहते।
राजधानी में आज भी ऐसे अधिकारियों की लंबी सूची है, जो एक ही जगह वर्षों से जमे हैं तथा जिनके आगे सामान्य प्रशासन विभाग के नियम बौने साबित हुए हैं। ऐसे अधिकारियों में आईएफएस अधिकारी एएस अहलावत, खेल संचालक संजय चौधरी, स्वास्थ्य संचालक डॉ. अशोक शर्मा और राजधानी परियोजना प्राधिकरण के परियोजना प्रशासक जवाहर सिंह के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जो वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं। उनके अलावा अन्य कई अधिकारी भी सालों से एक ही पद पर काबिज हैं।
लोक निर्माण विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग में तो सौ से अधिक अधिकारी सामान्य प्रशासन विभाग को ठेंगा दिखाते हुए अपने-अपने पदों पर बैठने के साथ-साथ अन्य विभागों का प्रभार भी संभाले हुए हैं। इतना ही नहीं, कई कनिष्ठ अधिकारियों ने योग्यता न होते हुए भी बड़े-बड़े पदों पर प्रभार ले रखा है। लोनिवि अधीक्षण यंत्री एसके मेहरा मुख्य अभियंता बने बैठे हैं तो शैलेंद्र शुक्ला प्रभारी प्रमुख अभियंता बने हुए हैं। भारतीय वन सेवा के अधिकारी रतन पुरवार, अनिमेष शुक्ला, नरेंद्र कुमार, आरजी सोनी और कृष्णमूर्ति तीन साल से भी अधिक समय से एक ही जगह पदस्थ हैं। आईएएस एस अहलावत तो प्रतिनियुक्ति पर ग्रामीण विकास विभाग में वर्षों से मजे लूट रहे हैं। राजधानी परियोजना प्रशासन में जवाहर सिंह भी दस से प्रतिनियुक्ति पर हैं, किंतु उन्हें उनके मूल विभाग में वापस नहीं भेजा जा रहा है। भोपाल नगर निगम के सहायक आयुक्त अभय बेड़ेकर चार साल से यहीं पदस्थ हैं। आयकर विभाग के छापों से चर्चा में आए डॉ. अशोक शर्मा आठ साल से अधिक समय से स्वास्थ्य विभाग का काम देख रहे हें। मिलिंद वाइकर सात साल के बाद भी वित्त विभाग में उप सचिव बने हुए हैं।
ये आईपीएस हैं वर्षों से एक ही जगह काबिज अधिकारी कब से जमे
बीएस बघेल - दिसंबर 2006
ओपी तंवर - मार्च 2004
अकीला हशमत - मई 2006
प्रभा चौधरी - अगस्त 2006
दशरथ कुमार - फरवरी 2003
बाबूलाल जायसवार - अगस्त 2003
मिलिंद वाइकर - नवंबर 2003
डीके सक्सेना - नवंबर 2006
अजय चौबे - अक्टूबर 2006
अदिति कुमार त्रिपाठी - दिसंबर 2003
ये आईएफएस भी जमे हैं
एएस अहलावत - अगस्त 2009
रतन पुरवार - दिसंबर 2004
अनिमेष शुक्ला - जनवरी 2003
नरेंद्र कुमार - 2006
ये आईपीएस भी एक ही जगह काबिज
डीजी कापदेव - फरवरी 2004
संजय चौधरी - मई 2005
उपेंद्र जैन - मई 2006
गोविंद प्रताप सिंह - मई 2002
भोपाल (डीएनएन)। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के नियमानुसार कोई भी अधिकारी एक ही विभाग में तीन साल से अधिक समय तक पदस्थ नहीं रह सकता, किंतु राज्य मंत्रालय में ही इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आयकर छापे से सुर्खियों में आए आईएएस अफसर अरविंद जोशी जल संसाधन विभाग में पांच साल से जमे थे। यदि आयकर विभाग उनके यहां छापा नहीं मारता तो उनका निलंबन तो होता ही नहीं और वे प्रमुख सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी जमे रहते।
राजधानी में आज भी ऐसे अधिकारियों की लंबी सूची है, जो एक ही जगह वर्षों से जमे हैं तथा जिनके आगे सामान्य प्रशासन विभाग के नियम बौने साबित हुए हैं। ऐसे अधिकारियों में आईएफएस अधिकारी एएस अहलावत, खेल संचालक संजय चौधरी, स्वास्थ्य संचालक डॉ. अशोक शर्मा और राजधानी परियोजना प्राधिकरण के परियोजना प्रशासक जवाहर सिंह के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जो वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं। उनके अलावा अन्य कई अधिकारी भी सालों से एक ही पद पर काबिज हैं।
लोक निर्माण विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग में तो सौ से अधिक अधिकारी सामान्य प्रशासन विभाग को ठेंगा दिखाते हुए अपने-अपने पदों पर बैठने के साथ-साथ अन्य विभागों का प्रभार भी संभाले हुए हैं। इतना ही नहीं, कई कनिष्ठ अधिकारियों ने योग्यता न होते हुए भी बड़े-बड़े पदों पर प्रभार ले रखा है। लोनिवि अधीक्षण यंत्री एसके मेहरा मुख्य अभियंता बने बैठे हैं तो शैलेंद्र शुक्ला प्रभारी प्रमुख अभियंता बने हुए हैं। भारतीय वन सेवा के अधिकारी रतन पुरवार, अनिमेष शुक्ला, नरेंद्र कुमार, आरजी सोनी और कृष्णमूर्ति तीन साल से भी अधिक समय से एक ही जगह पदस्थ हैं। आईएएस एस अहलावत तो प्रतिनियुक्ति पर ग्रामीण विकास विभाग में वर्षों से मजे लूट रहे हैं। राजधानी परियोजना प्रशासन में जवाहर सिंह भी दस से प्रतिनियुक्ति पर हैं, किंतु उन्हें उनके मूल विभाग में वापस नहीं भेजा जा रहा है। भोपाल नगर निगम के सहायक आयुक्त अभय बेड़ेकर चार साल से यहीं पदस्थ हैं। आयकर विभाग के छापों से चर्चा में आए डॉ. अशोक शर्मा आठ साल से अधिक समय से स्वास्थ्य विभाग का काम देख रहे हें। मिलिंद वाइकर सात साल के बाद भी वित्त विभाग में उप सचिव बने हुए हैं।
ये आईपीएस हैं वर्षों से एक ही जगह काबिज अधिकारी कब से जमे
बीएस बघेल - दिसंबर 2006
ओपी तंवर - मार्च 2004
अकीला हशमत - मई 2006
प्रभा चौधरी - अगस्त 2006
दशरथ कुमार - फरवरी 2003
बाबूलाल जायसवार - अगस्त 2003
मिलिंद वाइकर - नवंबर 2003
डीके सक्सेना - नवंबर 2006
अजय चौबे - अक्टूबर 2006
अदिति कुमार त्रिपाठी - दिसंबर 2003
ये आईएफएस भी जमे हैं
एएस अहलावत - अगस्त 2009
रतन पुरवार - दिसंबर 2004
अनिमेष शुक्ला - जनवरी 2003
नरेंद्र कुमार - 2006
ये आईपीएस भी एक ही जगह काबिज
डीजी कापदेव - फरवरी 2004
संजय चौधरी - मई 2005
उपेंद्र जैन - मई 2006
गोविंद प्रताप सिंह - मई 2002
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