करोड़ों की वसूली से किनारा!
ब्यूरो / बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। प्रदेश के सरकारी विभाग राजस्व वसूली में पिछड़े साबित हो रहे हैं। करीब आधा दर्जन ऐसे विभाग सामने आए हैं, जिनमें करोड़ों की राशि एक दशक से बकाया है। इस राशि की वसूली को लेकर विभागों ने कोई जतन ही नहीं किया।
यह ऐसे मामले हैं, जो एक दशक की समयावधि से अधिक के हैं। इनमें राज्य स्तर से वसूली के लिए निर्देश दिए गए, किंतु स्थानीय स्तर पर बकायादारों को प्रथम नोटिस तक नहीं दिया गया। सरकारी दस्तावेजों में बीते सालों का बकाया बताकर इसकी वसूली से पल्ला झाड़ लिया गया। बीते दिनों वित्त विभाग की समीक्षा में सामने आया कि वर्ष-1999 से पूर्व की करोड़ों की राशि डूबत खाते में चली गई है। इसमें अधिकतर मामलों में स्थानीय अफसरों की लापरवाही के कारण सरकार को नुकसान उठाना पड़ा है। सूत्र बताते हैं कि इसमें विक्रय कर का ही करीब सवा चार सौ करोड़ बकाया है। इसी तरह खनिज विभाग में सवा सौ करोड़ रुपए बकाया है। इनमें से अधिकतर विभागों में बकाया राशि वर्ष-1999 से पहले की है। इससे अब इस राशि की वसूली की संभावनाएं भी नगण्य हो गई है। इसलिए अफसरशाही में इसमें रुचि नहीं ले रही है।
निजी तबके को लाभ
इन आधा दर्जन विभागों ने निजी तबके के लोगों को अवैधानिक लाभ देने के उद्देश्य से ही इस वसूली से पल्ला झाड़ा है। तत्कालीन अफसरों ने नियमों से परे जाकर निजी तबके को लाभ पहुंचा और बाद में पदस्थ अफसर ने उलझे प्रकरणों से खुद को दूर रखने के उद्देश्य से वसूली पर जोर नहीं दिया। इसका सीधा फायदा अवैध रूप से निजी ठेकेदारों को मिला है।
हर साल करोड़ों डूबत में
बीते एक दशक से बकाया राशि के अलावा भी हर साल करोड़ों की राशि डूबत खाते में जा रही है। बिजली विभाग की तो अभी तक कुल पांच हजार करोड़ से अधिक की राशि बकाया है। इसी तरह खनिज विभाग में दो हजार करोड़ से अधिक की राशि विभिन्न मदों में वसूली जानी है। इनकी तरह दूसरे विभागों में भी हर साल करोड़ों की राशि बकाया रह जाती है।
राशि का हिसाब-किताब- (राशि करोड़ों में)
खनिज विभाग 113.25
सहकारिता विभाग 05.31
बिजली विभाग महकमा 11.07
परिवहन विभाग 21.56
वाणिज्य कर-उत्पाद शुल्क 51.25
मुद्रांक शुल्क 10.34
विक्रय कर 426.44
भोपाल (डीएनएन)। प्रदेश के सरकारी विभाग राजस्व वसूली में पिछड़े साबित हो रहे हैं। करीब आधा दर्जन ऐसे विभाग सामने आए हैं, जिनमें करोड़ों की राशि एक दशक से बकाया है। इस राशि की वसूली को लेकर विभागों ने कोई जतन ही नहीं किया।
यह ऐसे मामले हैं, जो एक दशक की समयावधि से अधिक के हैं। इनमें राज्य स्तर से वसूली के लिए निर्देश दिए गए, किंतु स्थानीय स्तर पर बकायादारों को प्रथम नोटिस तक नहीं दिया गया। सरकारी दस्तावेजों में बीते सालों का बकाया बताकर इसकी वसूली से पल्ला झाड़ लिया गया। बीते दिनों वित्त विभाग की समीक्षा में सामने आया कि वर्ष-1999 से पूर्व की करोड़ों की राशि डूबत खाते में चली गई है। इसमें अधिकतर मामलों में स्थानीय अफसरों की लापरवाही के कारण सरकार को नुकसान उठाना पड़ा है। सूत्र बताते हैं कि इसमें विक्रय कर का ही करीब सवा चार सौ करोड़ बकाया है। इसी तरह खनिज विभाग में सवा सौ करोड़ रुपए बकाया है। इनमें से अधिकतर विभागों में बकाया राशि वर्ष-1999 से पहले की है। इससे अब इस राशि की वसूली की संभावनाएं भी नगण्य हो गई है। इसलिए अफसरशाही में इसमें रुचि नहीं ले रही है।
निजी तबके को लाभ
इन आधा दर्जन विभागों ने निजी तबके के लोगों को अवैधानिक लाभ देने के उद्देश्य से ही इस वसूली से पल्ला झाड़ा है। तत्कालीन अफसरों ने नियमों से परे जाकर निजी तबके को लाभ पहुंचा और बाद में पदस्थ अफसर ने उलझे प्रकरणों से खुद को दूर रखने के उद्देश्य से वसूली पर जोर नहीं दिया। इसका सीधा फायदा अवैध रूप से निजी ठेकेदारों को मिला है।
हर साल करोड़ों डूबत में
बीते एक दशक से बकाया राशि के अलावा भी हर साल करोड़ों की राशि डूबत खाते में जा रही है। बिजली विभाग की तो अभी तक कुल पांच हजार करोड़ से अधिक की राशि बकाया है। इसी तरह खनिज विभाग में दो हजार करोड़ से अधिक की राशि विभिन्न मदों में वसूली जानी है। इनकी तरह दूसरे विभागों में भी हर साल करोड़ों की राशि बकाया रह जाती है।
राशि का हिसाब-किताब- (राशि करोड़ों में)
खनिज विभाग 113.25
सहकारिता विभाग 05.31
बिजली विभाग महकमा 11.07
परिवहन विभाग 21.56
वाणिज्य कर-उत्पाद शुल्क 51.25
मुद्रांक शुल्क 10.34
विक्रय कर 426.44
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