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बजट में सरकारी खेल!

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- एक करोड़ की राशि गफलत में। - खर्च बताया पर राशि मूल खाते में।

ब्यूरो / बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। प्रदेश में बजट पर जमकर सरकारी खेल चल रहा है। इसमें केंद्र की करोड़ों की राशि को वापस लौटाने से बचने के लिए पहले विभिन्न खातों में खर्च होना बताया गया, फिर वित्तीय सत्र निकल जाने के बाद वापस उस राशि को मूल बैंक खाते में जमा कर लिया गया। इससे केंद्र को राशि लौटाना भी नहीं पड़ी और खर्च बताकर हिसाब क्लीयर हो गया, जबकि पूरी राशि ज्यों की त्यों बची भी रही।
यह मामला उद्यानिकी विभाग में सामने आया है। केंद्र सरकार की ओर से वर्ष-2006-07 में उद्यानिकी सूचना केंद्र की स्थापना के लिए एक करोड़ से अधिक का अनुदान मिला था। इस राशि को उद्यानिकी विभाग ने खर्च करना बता दिया। इसके लिए पहले इस राशि को मूल बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया। बाद में केंद्र को आर्थिक हिसाब दिया गया कि उद्यानिकी सूचना केंद्र की स्थापना के लिए राशि जारी कर दी गई है। यह राशि मप्र राज्य कृषि उद्योग विकास मर्यादित भोपाल को जारी करना बताया गया। इससे केंद्र के रिकार्ड में तो राशि का हिसाब क्लीयर हो गया। बाद में सूचना केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को ही नकार दिया गया। इसका कारण बताया गया कि प्रदेश में स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क योजना है। इसी योजना के तहत सूचना केंद्र नेटवर्क का काम भी हो जाएगा। इस पर जब केंद्र ने राशि की पड़ताल की, तो उक्त राशि को बाद में स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क के लिए जारी करना बताया गया, जबकि इसके लिए अलग से राशि मंजूर थी। इसके बाद राशि फिर मूल खाते में जमा कर दी गई। इसके बाद से ही इस राशि के उपयोग को लेकर गफलत की स्थिति बनी रही।
उच्च अफसर भी अंधेरे में
खास बात यह रही की बजट के इस खेल में मप्र के उच्च अफसर भी अंधेरे में रहे। संचालक कार्यालय के स्तर पर ही विभाग में बजट को इधर से उधर कर दिया गया। विभाग प्रमुख को जो दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, उसमें इस हेर-फेर का कोई जिक्र नहीं किया गया। इससे विभागीय प्रमुख स्तर पर भी इस राशि को लेकर गफलत रही।
फैक्ट फाइल
-  01.01 करोड़ की राशि की गडबड़।
-  2007 में हुई बजट में अनियमितता।
-  03 सालों से राशि गफलत में पड़ी।
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