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विकास की कवायद पर ग्रहण

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- पंद्रह एमओयू निरस्त। - शेष पर अगले माह होगा सख्त निर्णय।


शाहनवाज खान/बिच्छू डॉट काम
भोपाल (डीएनएन)। पंचायतों और विकास यात्राओं में व्यस्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार के 41 मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (एमओयू) खिसकते जा रहे हैं। दो दर्जन से अधिक कंपनियां एमओयू में रुचि नहीं ले रही हैं। वहीं 15 एमओयू को सरकार ने निरस्त कर दिया है। विदेशों में हुए एमओयू भी संकट में हैं। सरकार के कर्ताधर्ताओं और अफसरों ने विदेशों में एमओयू के नाम पर खूब दौरे किए जबकि अधिकांश एमओयू में निवेश राशि का उल्लेख तक नहीं है।
उद्योग विभाग का ट्रेड एवं इंवेस्टमेंट फेसिलिटेशन कार्पोरेशन अब निष्क्रिय कंपनियों के एमओयू को निरस्त करने पर विचार कर रहा है। अगले माह मार्च तक इन पर ठोस निर्णय लेने की बात कही जा रही है। सूत्र बताते हैं कि अब तक हुए छह बड़े निवेशक सम्मेलन सहित अन्य करारों में सरकार ने 325 एमओयू किए। इसमें से 15 करारों को कार्पोरेशन निरस्त कर चुका है और 26 करारों पर संकट की स्थिति है। सरकार सिंगल विंडो सिस्टम और लैंड बैंक जैसी सुविधाएं देकर भी निवेशकों को रोकने में सफल नहीं हो पा रही है। सरकार के हाथ से 12 हजार 983 करोड़ के निवेशक खिसक चुके हैं और अन्य कंपनियां भी प्रदेश से खिसकने की तैयारी में हैं। कार्पोरेशन के सूत्रों का कहना है कि अब तक केवल 12 कंपनियां ही करार के तहत उत्पादन आरंभ कर सकी है, जबकि 174 कंपनियां अभी सर्वे तक ही सीमित हैं।
यह कंपनियां प्रदेश का संपूर्ण वातावरण जानकर फूंक-फंूक कर कदम रख रही हैं। यही कारण है कि विदेश में किए अब तक के कुल 18 एमओयू में से 11 में निवेश राशि तक का उल्लेख नहीं है। सरकार का दावा है कि वह नामी कंपनियों से ही करार कर रही है तो फिर विदेशों की कंपनियों के करार में निवेश राशि का उल्लेख क्यों नहीं है? कहीं सरकार के मंत्रियों एवं अफसरों ने विदेशों में करार सम्मेलन के नाम पर केवल सैर-सपाटा तो नहीं किया? वर्तमान में 309 एमओयू जीवित हैं, जिनमें करीब 4 लाख 28 हजार 86 करोड़ की राशि निवेश की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
कार्पोरेशन के सूत्र बताते हैं कि सरकार ने 15 एमओयू को निरस्त कर दिए हैं। निरस्त होने वाले एमओयू में दो विदेशों में संपन्न हुए थे। कार्पोरेशन के एमडी प्रवीण गर्ग का कहना है कि एमओयू की लगातार समीक्षा की जाती है।

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