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प्रभात को प्रदेश की जिम्मेदारी?

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ब्यूरो / बिच्छू डॉट काम
भोपाल (डीएनएन)। इंदौर में भाजपा का राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न होने के बाद अब मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष की खोज शुरू हो गई है। हालांकि इस पद की दौड़ में कई दिग्गज हैं, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि राज्यसभा सदस्य प्रभात झा को यह दायित्व सौंपने का मन बना लिया गया है, जिसकी औपचारिक घोषणा होना शेष है।
प्रभात झा के अलावा इस समय जो नाम इस पद के लिए सामने आ रहे हैं, उनमें पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री कप्तान सिंह सोलंकी, प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल दवे, प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सिंह ठाकुर, मंत्री अनूप मिश्रा सहित लक्ष्मीकांत शर्मा शामिल हैं। इनमें से सभी नेता अपनी-अपनी जुगाड़ बैठा रहे हैं। सबकी अपनी अलग-अलग खासियत है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व के लिए यह चुनाव करना कठिन हो रहा है कि किसको चुना जाए और किसको दरकिनार किया जाए। इसलिए मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव पिछड़ते जा रहे हैं। अभी तक तय नहीं हो पाया कि आखिर इस पद पर आखिरी मुहर कब तक लग पाएगी। बहरहाल, इस पद की दौड़ में शामिल नेताओं की अपनी-अपनी खासियत है। यदि हम राज्यसभा सदस्य प्रभात झा की दावेदारी को देखें तो उनका सबसे बड़ा पक्ष संघ और पूर्व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह की पहली पसंद है। इसके अलावा उनकी प्रदेश स्तर पर संगठन कार्यकर्ताओं में पकड़ के साथ-साथ उनका भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय सचिव के रूप में ताजपोशी खास मायने रखती है। वह अच्छे विचारक, मिलनसार, मृदुभाषी होने के कारण पार्टी की पसंद बन सकते हैं। इस दौड़ में पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री कप्तान सिंह सोलंकी का नाम भी तेजी के साथ सामने आया है। प्रदेश संगठन मंत्री के रूप में वह प्रदेश में अपनी अच्छी छवि बनाने में सफल रहे। कार्यकर्ताओं में लोकप्रियता के साथ-साथ संगठन में पकड़ बनाने में सफल रहे हैं। कट्टर संघ पृष्ठभूमि और भाजपा के कद्दावर नेता गोपीनाथ मुंडे के नजदीकी हैं। महाराष्ट्र से जुड़े रहने के कारण भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी से मधुर और विश्वसनीय रिश्ते हैं। उनकी छवि एक दबंग नेता के रूप में भी है, इसलिए उनकी दावेदारी भी काफी मजबूत कही जा सकती है। पर मूलत: वह स्वयं ही इस पद के इच्छुक नहीं हैं। वैसे भी कप्तान सिंह सोलंकी सरीखे नेता का स्तर भी राष्ट्रीय राजनीति का है। इस दौड़ में वर्तमान अध्यक्ष नरेंद्र सिंह अपनी ताजपोशी पुन: करने में एड़ी चोटी का जोर लगा देंगे। प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष अनिल दवे की दावेदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वे भाजपा के भीतर चुनाव मैनेजमेंट से लेकर बड़े कार्यक्रमों की सफलता के लिए सिद्धहस्त माने जाते हैं। वे अपनी हाईटेक कार्यप्रणाली के कारण संगठन और सरकार की पहली पसंद बनने में सफल रहे हैं। संगठन के भीतर काम करने का दीर्घकालीन अनुभव भी उनका एक बड़ा प्लस पांइट है। इसके अलावा उन्होंने नर्मदा समग्र पर कार्य कर अपनी एक अलग छवि बनाई है। भूपेंद्र सिंह ठाकुर का नाम भी इस दौड़ में गिना जा रहा है। वे अभी प्रदेश महामंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। लेकिन प्रदेश में उनका प्रभाव नहीं है, न ही संगठन में  अपनी पकड़ बना पाए।
हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का उनको समर्थन है। इसके अलावा उनके पक्ष में ऐसी कोई बात नहीं है, जो कि उन्हें प्रबल दावेदार बनाए। ब्राह्मण लाबी से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा का नाम भी गिना जा रहा है। उनकी दिल्ली दरबार में अच्छी घुसपैठ है, लेकिन कड़कमिजाज, अक्खड़ व्यवहार के कारण वह कार्यकर्ताओं की पसंद नहीं बन पाए हैं। इस दौड़ में शामिल एक और ब्राह्मण नेता जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने दो बार राज्य सरकार में मंत्री रहते हुए प्रदेश में अपनी अच्छी पकड़ बनाई है। उनका सहज, सरल, स्वभाव और कार्यकर्ताओं में नजदीकी खास मायने रखती है। उनके भीतर संगठन को चलाने की अच्छी क्षमताएं हैं। उन्हें प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से लेकर दिल्ली दरबार में भी अच्छे मंत्रियों की श्रेणी में शुमार किया गया है।
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