गडकरी की ताजपोशी 10 करोड़ में
- भाजपा अध्यक्षों में सबसे महंगी ताजपोशी।
ब्यूरो/बिच्छू डॉट काम
भोपाल (डीएनएन)। भारतीय जनता पार्टी में नवनियुक्त अध्यक्ष नितिन गडकरी की ताजपोशी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इतना रुपया तो अटल बिहारी वाजपेयी अथवा लालकृष्ण आडवाणी के पार्टी अध्यक्ष बनने पर भी खर्च नहीं हुआ था। गडकरी की ताजपोशी का खर्च प्रारंभिक आंकड़ों में ही दस करोड़ से अधिक माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के नौवें अध्यक्ष के रूप में नितिन गडकरी की ताजपोशी 18 फरवरी को इंदौर के कुशाभाऊ ठाकरे नगर (ओमेक्स सिटी) में हो गई। गडकरी की नियुक्ति निवृत्तमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन राव भागवत और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सहमति के बाद की थी। नितिन गडकरी की नियुक्ति पर सहमति के लिए ही राष्ट्रीय परिषद का आयोजन किया जाना था। इसके लिए इंदौर का चयन किया गया। चंूकि नितिन गडकरी संघ शैली में ही रचे-बसे हैं, इसलिए उनकी इच्छा थी कि उनकी ताजपोशी (सहमति की मुहर) में सादगी होना चाहिए। किसी पांच सितारा होटल के बजाय आयोजन स्थल पर संघ के शिविरों की भांति तंबू बनें, ताकि सारे लोग उसी में रात भी गुजार सकें। नितिन गडकरी की इसी भावना के अनुरूप इंदौर बायपास मार्ग पर स्थित ओमेक्स सिटी का चयन किया गया था।
ओमेक्स सिटी ही क्यों?
- ओमेक्स सिटी का चयन होने पर यह सवाल भी उठे कि यही स्थान क्यों? सवाल यह था कि भले ओमेक्स में जगह काफी है, लेकिन सुविधा के नाम पर न तो बिजली थी और न पानी। यहां तक कि सड़क भी ठीक नहीं थी। ऐसी जगह पर तंबू लगाना निश्चित ही खर्चीला था।
- इस पर भाजपा सांसद सुमित्रा महाजन ने आपत्ति उठा कर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को ब्ल्यू प्रिंट दिखाते हुए अधिवेशन स्थल बदलने की सलाह दी थी।
- कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने तो स्पष्ट तौर पर कहा था कि भू माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए ही ओमेक्स सिटी में अधिवेशन किया जा रहा है।
- सूत्रों के अनुसार इंदौर-देवास को जोडऩे वाले बायपास पर केवल ओमेक्स सिटी ही नहीं है। उसी की दो सिटी है। इसके अलावा एक दर्जन अन्य कालोनाइजरों की सिटी आधी-अधूरी बनी हुई है। इन सीटियों के मुख्य द्वार राष्ट्रीय राजमार्ग के अनुरूप नहीं है अर्थात सीधे सड़क मार्ग की ओर से अवैधानिक भी है। ओमेक्स सिटी के प्रवेश द्वार को लेकर ही मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
क्यों हुई खर्चीली ताजपोशी
- ओमेक्स सिटी में भाजपा को पूरा का पूरा गांव बनाना था। कुशाभाऊ ठाकरे गांव की परिकल्पना को साकार करने 1200 से अधिक तंबू लगाए जाने थे, वे भी नेताओं की अलग-अलग श्रेणियों में। इसके अलावा अधिवेशन स्थल, प्रदर्शनी स्थल, भोजन कक्ष, केंद्रीय कार्यालय आदि का निर्माण कोई आसान काम नहीं था।
- प्रारंभिक तौर पर ही जो आंकड़े मिलते हैं, उसमें कुल 1198 तंबू लगाए गए थे। ये तंबू अलग-अलग श्रेणी के थे। लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, रामलाल, अनंत कुमार जैसे दो दर्जन अति विशिष्ट नेताओं के लिए 24 तंबू बनाए गए, वहीं विशिष्ट नेताओं के लिए 200 तथा सांसद विधायक, भाजपा अध्यक्षों आदि के लिए 976 तंबू बनाए गए। इन तंबूओं पर कुल ढाई करोड़ खर्च आंका गया है अर्थात एक तंबू पर 14 हजार 300 रुपए खर्च माना गया। यह खर्च किसी भी पांच सितारा होटल से कई गुना अधिक बताया जाता है। इतना खर्च करने के बाद दो हजार प्रतिनिधि भी तंबुओं में नहीं ठहरे। उन्हें होटलों का सहारा ही लेना पड़ा।
- कुशाभाऊ ठाकरे नगर बसाने के खर्च पर गौर किया जाए तो बिजली पर भी करोड़ रुपए खर्च बताया जाता है, जबकि ड्रेनेज लाइन पर 90 लाख, ट्रेफिक पर 15 लाख, भोजन पर 48 लाख तथा पानी पर 24 लाख रुपए खर्च हो गए। 45 लाख रुपए अन्य मद में खर्च होना बताया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि नितिन गडकरी के तीन दिनी ताजपोशी आयोजन पर दस करोड़ रुपए से अधिक का खर्च प्रारंभिक रूप से आंका जा रहा है।
- सूत्र बताते हैं कि इस ताजपोशी में भाजपा नेताओं को संगठन शक्ति की जो घुट्टी पिलाई गई है, उसका लाभ पार्टी को मिले या न मिले, ओमेक्स सिटी सहित इस क्षेत्र में बन रही व बनने वाली कालोनियों को जरूर मिलेगा।
फैक्ट फाइल
कुल तंबू 1198
वीवीआईपी 0024
वीआईपी 0200
सामान्य 0976
प्रति तंबू खर्च 20,868 रुपए
आयोजन खर्च (करोड़ में)
टेंट 2.50
बिजली 1.00
ड्रेनेज 0.90
भोजन 0.48
पानी 0.24
ट्रेफिक 0.15
अन्य खर्च 0.45
कूलर खर्च 5.72
बड़े नेताओं का हवाई खर्च व होटल खर्च अलग है।
भोपाल (डीएनएन)। भारतीय जनता पार्टी में नवनियुक्त अध्यक्ष नितिन गडकरी की ताजपोशी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इतना रुपया तो अटल बिहारी वाजपेयी अथवा लालकृष्ण आडवाणी के पार्टी अध्यक्ष बनने पर भी खर्च नहीं हुआ था। गडकरी की ताजपोशी का खर्च प्रारंभिक आंकड़ों में ही दस करोड़ से अधिक माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के नौवें अध्यक्ष के रूप में नितिन गडकरी की ताजपोशी 18 फरवरी को इंदौर के कुशाभाऊ ठाकरे नगर (ओमेक्स सिटी) में हो गई। गडकरी की नियुक्ति निवृत्तमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन राव भागवत और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सहमति के बाद की थी। नितिन गडकरी की नियुक्ति पर सहमति के लिए ही राष्ट्रीय परिषद का आयोजन किया जाना था। इसके लिए इंदौर का चयन किया गया। चंूकि नितिन गडकरी संघ शैली में ही रचे-बसे हैं, इसलिए उनकी इच्छा थी कि उनकी ताजपोशी (सहमति की मुहर) में सादगी होना चाहिए। किसी पांच सितारा होटल के बजाय आयोजन स्थल पर संघ के शिविरों की भांति तंबू बनें, ताकि सारे लोग उसी में रात भी गुजार सकें। नितिन गडकरी की इसी भावना के अनुरूप इंदौर बायपास मार्ग पर स्थित ओमेक्स सिटी का चयन किया गया था।
ओमेक्स सिटी ही क्यों?
- ओमेक्स सिटी का चयन होने पर यह सवाल भी उठे कि यही स्थान क्यों? सवाल यह था कि भले ओमेक्स में जगह काफी है, लेकिन सुविधा के नाम पर न तो बिजली थी और न पानी। यहां तक कि सड़क भी ठीक नहीं थी। ऐसी जगह पर तंबू लगाना निश्चित ही खर्चीला था।
- इस पर भाजपा सांसद सुमित्रा महाजन ने आपत्ति उठा कर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को ब्ल्यू प्रिंट दिखाते हुए अधिवेशन स्थल बदलने की सलाह दी थी।
- कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने तो स्पष्ट तौर पर कहा था कि भू माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए ही ओमेक्स सिटी में अधिवेशन किया जा रहा है।
- सूत्रों के अनुसार इंदौर-देवास को जोडऩे वाले बायपास पर केवल ओमेक्स सिटी ही नहीं है। उसी की दो सिटी है। इसके अलावा एक दर्जन अन्य कालोनाइजरों की सिटी आधी-अधूरी बनी हुई है। इन सीटियों के मुख्य द्वार राष्ट्रीय राजमार्ग के अनुरूप नहीं है अर्थात सीधे सड़क मार्ग की ओर से अवैधानिक भी है। ओमेक्स सिटी के प्रवेश द्वार को लेकर ही मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
क्यों हुई खर्चीली ताजपोशी
- ओमेक्स सिटी में भाजपा को पूरा का पूरा गांव बनाना था। कुशाभाऊ ठाकरे गांव की परिकल्पना को साकार करने 1200 से अधिक तंबू लगाए जाने थे, वे भी नेताओं की अलग-अलग श्रेणियों में। इसके अलावा अधिवेशन स्थल, प्रदर्शनी स्थल, भोजन कक्ष, केंद्रीय कार्यालय आदि का निर्माण कोई आसान काम नहीं था।
- प्रारंभिक तौर पर ही जो आंकड़े मिलते हैं, उसमें कुल 1198 तंबू लगाए गए थे। ये तंबू अलग-अलग श्रेणी के थे। लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, रामलाल, अनंत कुमार जैसे दो दर्जन अति विशिष्ट नेताओं के लिए 24 तंबू बनाए गए, वहीं विशिष्ट नेताओं के लिए 200 तथा सांसद विधायक, भाजपा अध्यक्षों आदि के लिए 976 तंबू बनाए गए। इन तंबूओं पर कुल ढाई करोड़ खर्च आंका गया है अर्थात एक तंबू पर 14 हजार 300 रुपए खर्च माना गया। यह खर्च किसी भी पांच सितारा होटल से कई गुना अधिक बताया जाता है। इतना खर्च करने के बाद दो हजार प्रतिनिधि भी तंबुओं में नहीं ठहरे। उन्हें होटलों का सहारा ही लेना पड़ा।
- कुशाभाऊ ठाकरे नगर बसाने के खर्च पर गौर किया जाए तो बिजली पर भी करोड़ रुपए खर्च बताया जाता है, जबकि ड्रेनेज लाइन पर 90 लाख, ट्रेफिक पर 15 लाख, भोजन पर 48 लाख तथा पानी पर 24 लाख रुपए खर्च हो गए। 45 लाख रुपए अन्य मद में खर्च होना बताया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि नितिन गडकरी के तीन दिनी ताजपोशी आयोजन पर दस करोड़ रुपए से अधिक का खर्च प्रारंभिक रूप से आंका जा रहा है।
- सूत्र बताते हैं कि इस ताजपोशी में भाजपा नेताओं को संगठन शक्ति की जो घुट्टी पिलाई गई है, उसका लाभ पार्टी को मिले या न मिले, ओमेक्स सिटी सहित इस क्षेत्र में बन रही व बनने वाली कालोनियों को जरूर मिलेगा।
फैक्ट फाइल
कुल तंबू 1198
वीवीआईपी 0024
वीआईपी 0200
सामान्य 0976
प्रति तंबू खर्च 20,868 रुपए
आयोजन खर्च (करोड़ में)
टेंट 2.50
बिजली 1.00
ड्रेनेज 0.90
भोजन 0.48
पानी 0.24
ट्रेफिक 0.15
अन्य खर्च 0.45
कूलर खर्च 5.72
बड़े नेताओं का हवाई खर्च व होटल खर्च अलग है।
Rate this article



del.icio.us
Digg