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कसाब का एक और रहनुमा

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- शासन के आदेश को आईएएस की चुनौती

समाज को लोकसेवकों के प्रति संवेदनशील होने और मीडिया को जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने वाले राघव चंद्रा क्या यह बताने की कृपा करेंगे कि लोकसेवकों की समाज के प्रति क्या जिम्मेदारी है? क्या वे आईएएस दंपति द्वारा करोड़ों रुपए अर्जित करने को लोकसेवकों की जिम्मेदारी बताएंगे? क्या योगीराज शर्मा जैसे महाभ्रष्ट अफसर की करतूतों को वैध बताएंगे? आईजी राजेंद्र कुमार मामले में पुलिस महानिदेशक एसके राउत भी कह चुके हैं कि उन्होंने गलत उदाहरण पेश किया है, तो राघव चंद्रा उनके निलंबन को गलत क्यों ठहरा रहे हैं? क्या यह शासन के आदेश को चुनौती नहीं है?
महेश बागी /बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।मुंबई हमले के गिरफ्तार आरोपी मो. अजमल कसाब से प्रेरणा ग्रहण करने के मामले में शासन ने एक आईजी को क्या निलंबित कर दिया कि नौकरशाही बौखला गई है। एक आईएएस ने यह मामला उछलने पर मीडिया और समाज को अपनी जवाबदेही तय करने की सलाह दी। जब यह सब कहा गया, तब प्रदेश के आईएएस दंपति के घर से नोटों का जखीरा बरामद हुआ। ऐसे में यह सवाल सहज ही उठता है कि मीडिया और समाज को अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराने वाले लोकसेवक की समाज के प्रति क्या जिम्मेदारी है? उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस (स्पेशल फोर्स) के आईजी राजेंद्र कुमार ने इंदौर में निशानेबाजी प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में कहा था- ट्रेनिंग से क्या हो सकता है? इसका एक उदाहरण देता हूं- आतंकवादी कसाब 8वीं पास है, उसने भी एक साल की ट्रेनिंग ली। इससे वह हथियार अच्छे से चला सकता है। इसमें इसके लिए जज्बा था। आप उससे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं, आपके पास ज्यादा संसाधन हैं, ज्यादा समझदार हैं, तो आपमें वह जज्बा क्यों नहीं है। इस विवादास्पद बयान को मीडिया द्वारा उछाले जाने के बाद राज्य शासन ने आईजी राजेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया।
शासन के इस आदेश से नौकरशाही बौखला गई है। इसका एक उदाहरण सामने आया है। सोशल वेबसाइट स्क्रेच माय सोल पर नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव राघव चंद्रा ने लिखा है- 'एक आईजी रेंक के अफसर ने अपने ट्रुप के जवानों को उनकी शारीरिक क्षमता तन्दुरूस्ती, व्यवहार और आधुनिक हथियारों की टेक्नालॉजी की जानकारी देते हुए सदा सजग रहने को कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें न केवल अपने मित्रों से वरन अपने दुश्मनों से भी सीखना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने कसाब का उदाहरण दिया और कहा कि आठवीं पास व्यक्ति अभ्यास से आधुनिक शस्त्रों को चलाने का शिक्षण प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि वह अच्छा आदमी होता या उसने जो हत्याएं की, वह नहीं की होती तो वह प्रशंसनीय कार्य कहा जा सकता था। अचानक टीवी चैनल्स लगातार इस संबंध में बुलेटिन प्रसारित कर रहे हैं और यह स्पष्ट है कि अधिकारी ने ऐसा कहा।'
'मैं नहीं सोचता कि एक देशभक्त और सोच समझ रखने वाला अधिकारी इस प्रकार की बात कह कर अपने राष्ट्र का अपमान करेगा और एक आतंकवादी की प्रशंसा करेगा। इससे स्पष्ट है कि इस बात को संदर्भ से बाहर कम देखा जा रहा है।  सिविल सर्वेंट बहुत कमजोर हैं। एक मामूली गलती या उदाहरण उनके लिए दुश्मन पैदा कर देते हैं और उनकी खिंचाई की जाती है। अत: समाज को अधिकारियों के संबंध में बात करते समय सोच-समझ कर बोलना चाहिए। मीडिया को चाहिए कि ऐसी घटनाओं को कवर करने के संबंध में उत्तरदायित्वपूर्ण लिखना चाहिए। अधिकारियों का कॅरियर दांव पर है।' समाज को लोकसेवकों के प्रति संवेदनशील होने और मीडिया को जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने वाले राघव चंद्रा क्या यह बताने की कृपा करेंगे कि लोकसेवकों की समाज के प्रति क्या जिम्मेदारी है? क्या वे आईएएस दंपति द्वारा करोड़ों रुपए अर्जित करने को लोकसेवकों की जिम्मेदारी बताएंगे? क्या योगीराज शर्मा जैसे महाभ्रष्ट अफसर की करतूतों को वैध बताएंगे? आईजी राजेंद्र कुमार मामले में पुलिस महानिदेशक एसके राउत भी कह चुके हैं कि उन्होंने गलत उदाहरण पेश किया है, तो राघव चंद्रा उनके निलंबन को गलत क्यों ठहरा रहे हैं? क्या यह शासन के आदेश को चुनौती नहीं है? वेबसाइट पर राघव चंद्रा की टिप्पणी के बाद समाचार लिखे जाने तक कुल 12 'कमेंट' आए, जिनमें मनोज मिश्र, गणेश आर., अनीता, प्रो. प्रेममोहन लखोटिया, देवकुमार वासुदेवन और शेहला मसूद प्रमुख हैं। अधिकतर कमेंट श्री चंद्रा के कथन से सहमत हैं।

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