Welcome to Bichhu.com: रंगशाला लघुकथा : लुटेरे ================================================================================ bichhu on 18 July, 2010 09:55:00 - रतन चंद्र रत्नेशहम दोनों ने अपनी-अपनी पत्नियों और बच्चों को होटल में ही रहने दिया और समुद्र के किनारे आ गए। दूर-दूर तक फैला पड़ोसी देशों की तरह लड़ते हैं साहित्य और मीडिया ================================================================================ bichhu on 18 July, 2010 09:53:00 साहित्य और मीडिया दो ऐसे पड़ोसी देश की तरह हैं जो हमेशा एक दूसरे से लड़ते रहते हैं। इनकी दुश्मनी पुरानी है। फिर भी दोनों समीक्षा : औरत की आग और प्यास की कहानी ================================================================================ bichhu on 18 July, 2010 09:51:00 किताब : मित्रो मरजानी (उपन्यास) प्रकाशक : राजकमल पेपरबैक्स, नई दिल्ली कीमत : 50 रुपये पेज : 99 जिस दौर में हिंदी कथा साहित्य घर-परिवार दोहे ================================================================================ bichhu on 18 July, 2010 09:50:00 हार जीत के बीच में जीवन इक संगीत।मिलन होय मनमीत से हार बने तब जीत।।डोर बढ़े जब प्रीत की बनते हैं तब मीत।वही मीत जब मोक्षदायिनी ================================================================================ bichhu on 18 July, 2010 09:48:00 कहानी : सुभाष चंद्र गांगुलीजेठ की दोपहर। रमादेवी का शव लेकर हम पहुंचे गंगा के तट पर। जानलेवा लू। बालू के कण तेज हवा के पुस्तक समीक्षा ================================================================================ bichhu on 02 July, 2010 11:04:00 जेन ऑस्टन के इस नॉवल को साहित्य की दुनिया में क्लासिक का दर्जा हासिल है। सन 1813 में आई इस किताब पर कई फिल्में भी लघुकथा : लुटेरे ================================================================================ bichhu on 02 July, 2010 11:02:00 - रतन चंद्र रत्नेश हम दोनों ने अपनी-अपनी पत्नियों और बच्चों को होटल में ही रहने दिया और समुद्र के किनारे आ गए। दूर-दूर तक फैला ठग का ग्रास ================================================================================ bichhu on 02 July, 2010 11:01:00 मक्का शरीफ की तीर्थयात्रा के लिए जब दो शहरी चलने लगे तो एक देहाती भी उनके साथ चलने के लिए तैयार हो गया। चलते समय एक ख्वाब की कब्रगाह ================================================================================ bichhu on 02 July, 2010 10:52:00 लो मर गई मरजानीतब भी चैन नहींदेह से झाँक कर देख रही है तमाशाकुनबुना रहे हैं पतिबेवजह छूट गया दफ्तर सोमवार के दिन हीबच्चों की खाप की सीढ़ी ================================================================================ bichhu on 02 July, 2010 11:06:00 सत्ता-शिखर के लिए हमारे देश में आम नागरिक के पास और कुछ हो न हो, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने उसे मत देने का हक कहानी : विधाता ================================================================================ bichhu on 02 July, 2010 10:48:00 - आबिद सुरतीआग बरसाता हुआ मई महीने का सूरज, चिलचिलाती धूप, हवाओं के साथ बहती लू, चौपाटी का उबलता हुआ समंदर, छिछले पानी में तपती काली कहानी : नारी-हृदय ================================================================================ bichhu on 18 June, 2010 10:52:00 शहर में प्लेग था। लोग धड़ाधड़ मर रहे थे। बीमारी भी ऐसी थी। बीमार पड़ते ही लाश निकलते देर न लगती। सब लोग शहर छोड़-छोड़कर लघुकथा : प्रेम ================================================================================ bichhu on 18 June, 2010 11:00:00 - इवान तुर्गनेवशिकार से लौटते हुए मैं बगीचे के बीचों-बीच बने रास्ते पर चला जा रहा था। मेरा कुत्ता मुझसे आगे-आगे दौड़ा जा रहा था। गजलें ================================================================================ bichhu on 18 June, 2010 05:59:00 ये घर बनाने वालेये घर बनाने वालेबेघर सदा रहे हैं ये घर बनानेवालेतारों की छत खुली हैधरती बनी बिछौनाइस बेरहम शहर में मस्ती में डूब समीक्षा : काशी के अस्सी-काशी के ठेठपन का निराला अंदाज-ए-बयां ================================================================================ bichhu on 18 June, 2010 11:04:00 - ज्योति वर्मा...बसी है गंगा के रम्य तट पर, ये तीनों लोकों से न्यारी काशी।इसमें कोई संदेह नहीं कि भगवान शिव की नगरी काशी यानी सोनिया पर लिखी किताब ने धूम मचाई ================================================================================ bichhu on 18 June, 2010 11:02:00 कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भारतीयों ने भले ही बड़ी सहजता से स्वीकार कर लिया हो, पर दूसरे देशों के लिए उनकी सफलता आश्चर्य का बेला का जीन क्या है ================================================================================ bichhu on 06 May, 2010 12:22:00 बिजारिया के मत्स्य उद्योग से सिर्फ पाचू परिवार ही तबाह हुआ होता तो भी एक बात होती। यहां तो समुद्री अंत:वाही अफवाहों के हजारों मत्स्यजीवी कांतिमोहन सोज की दो गज़लें ================================================================================ bichhu on 06 May, 2010 12:29:00 1क्या उसे इतना भा गया हूं मैंबारहा क्यूं छला गया हूं मैं।कितना समझा है वो खुदा जानेयूं तो सब कुछ सुना गया हूं मैं।अब खामोशी गीत ================================================================================ bichhu on 06 May, 2010 12:24:00 बद अच्छा बदनाम बुरा अपनों का एहसान बुरा। उलटी सांसें गिनता है वह जल्लादों का काम बुरा। रहने वाला अच्छा है पर उसके सिर इलजाम वेब पत्रकारिता : एक प्रामाणिक पुस्तक ================================================================================ bichhu on 06 May, 2010 12:28:00 पत्रकारिता की दुनिया, सारी दुनिया के बदलने के कई घंटे पहले बदल जाती है। यह सिर्फ एक कहावत नहीं है अंडे और चूजे की तरह,