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रंगशाला

जमी हुई झील

मनमोहन सरलहमारी कैब को चेक पोस्ट पर रोक दिया गया। मैंने तो समझा था कि यह तो महज औपचारिकता भर होगी। पासपोर्ट, विसा वगैरह जाँच
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भविष्य की तैयारी

विद्यासागर नौटियाल पिता की अर्थी लोगों की दी हुई भीख के सहारे बनाई गई है, यह विचार उसे बेहद भारी मालूम होने लगा था। मंगनी ...
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मेरा पूरा नाम?

शीला इंद्र आज सुबह से मीना की आँखों में बार-बार आँसू भर आते हैं। रह-रहकर उसे वह दिन याद आ रहा है जब वह पहली ...
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भीड़ है तो क्या...

संगीता सेठीनर्सिंग होम के हरे परदों से ढंके कमरों के बीच अहाते से गुजरकर जया डोम में जा खड़ी हुई। गर्भवती स्त्रियों के जमावड़े से ...
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मेरा पहला जाम....मंटो के नाम

आलेख: देवेन्द्र सत्यार्थीमैं दिल्ली से लाहौर चला गया! पर दिल्ली के लतीफे बराबर मेरा पीछा करते रहे जिनमें मंटो का हाथ ज्यादा था। मैंने निर्णय ...
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दस्तख़त

धनवीर सन सैंतालीस वाली आजादी मिलने और उसके उपरांत देश विदेशघूमने से पहले सोवियत रूस के मित्रों की संस्था का सदस्य था। पर वह लाहौर में रहने के दौरान की बातें थीं। और तब तो बड़े-बड़े भारतीय नेता सोवियत रूस के मित्र थे और तब माक्र्सवाद उनके कथनानुसार प्रतिगामी अर्थात पीछे चलने वाला नहीं हुआ था। इस साधारण व्यक्ति को अभी धनवीर के बारे में वह भी गलतफहमी कायम थी, क्योंकि उसे अभी माक्र्सवाद के प्रतिगामी हो जाने का ज्ञान नहीं हुआ था। इस भ्रम में वह साधारण व्यक्ति धर्मवीर जी से किसी यान्त्रिक काम लेने के लिए आर्थिक सहायता की आस लगाए बैठा था।...
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किशनगोपी का लौट आना

सोए हुए नंगे वृक्षों ने हरे कोमल वस्त्र धारण कर लिए। वृक्षों की डालियों पर नित्य रोज नए प्रवासी पक्षी दिखाई देने लग गए थे- ...
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एक विवाह

बारात बड़ी हो तो हर बाराती चाहता है कि देखने वाले उसे देखें। हम थे कि चाहते थे कि हमें कोई भी न देखे। पर लोग थे कि हमें देखना चाहते थे। यह बाराती कौन हैं जो केवल तीन ही जने हैं। इतना बड़ा बाजा क्यों बज रहा है? क्या वह इस योग्य हैं कि इतना बड़ा बाजा इनके आगे बजे?...
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दोस्तों की दुआएं बचा के रखता था

तमाम घर को बयाबां बनाके रखता थापता नहीं वो दीये क्यों बुझाके रखता थाबुरे दिनों के लिए उसने गुल्लकें भर लींमैं दोस्तों की दुआएं बचा ...
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विनिवेश

एक पल के लिए लगा जैसे वह किसी ऐसी घटना क्षितिज को छूकर आए थे, जो अनुभूति की देह को धो-पोंछकर उजला बना डालती है। दिक् और काल के साथ जहाँ घनत्व और आयतन के गुण धर्म का पैरहन भी बदल जाता हैं। तब आप यातना के कई प्रकाश वर्ष माचिस की डिबिया में रखकर सैर पर निकल सकते हैं। घटनाओं की विशृंाखलित कतार को उन्होंने परत-दर परत अपने नजदीक रखा था। वह इस बैगेज से छुटकारा नहीं चाहते थे। जहाँ उम्र के मॉनिटर पर सब-कुछ अथर्पूर्ण तरीके से दर्ज हो सके। चीजें अपने-अपने किरदार में पूरी तरह मुब्तिला हों। जीवन में किसी भी किस्म की ओवरलैपिंग वह शायद नहीं चाहते थे।...
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तुलसी-गंध जैसी मां

स्नेह की निर्मल नदी- निर्बंध जैसी मां कर्म की क्यारी की, तुलसी-गंध जैसी मां युग-युगों से दे रही, कुरबानियां खुद की कुरबानियों से शाश्वत, अनुबंध ...
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नारीवादी होना मेरी मजबूरी है : सुधा अरोड़ा

सुधा अरोड़ा कम लिखतीं हैं मगर जब लिखती हैं तब ऐसा लिखती हंै कि पाठक के मानस में उसकी छवि देर तक बनी रहती है ...
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जाने कहां होगी वह कहानी दीपा पंवार

रोज की तरह उस दिन भी तेज कदमों से स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी। घड़ी की सुई 12:47 बजा रही थी। 3 मिनट बाद ...
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जिंदगी में कामयाबी के लिए एक नायाब गाइडबुक

- जीत आपकी (सेल्फ हेल्प) - लेखक : शिव खेड़ा - प्रकाशक : मैकमिलन, नई दिल्ली - पेज : 292 (पेपरबैक) - कीमत : 285 ...
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कहानी : अपनी-अपनी राम-कहानी

- प्रेमलता पांडेरामदेई परेशान सोचती जा रही थी कि तभी बड़ी तेज़ी से एक बस उसके बिल्कुल पास आकर रुक गयी। रामदेई घबरायी हुई भौचक्की ...
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लघुकथा : अप्रत्याशित

- कृष्ण शर्माउनके संबंध में यह सर्वविदित था कि वे शालीनता, शिष्टाचार तथा कर्तव्यपरायणता जैसे गुणों की खान हैं। यही नहीं, अपने मित्रों तथा परिचितों ...
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कविता : जिजीविषा

- सुभाष जोशीजो,प्रतिकूल परिस्थितियों में भी,जीने का दम-खम रखते हैं।किसी प्राचीन मंदिर केशिखर पर स्थित,पीपल के पौधे को देखो,जिसे आँधी और तूफाननिरंतर नष्ट करने का ...
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कविता : दरवाजा

- फाल्गुनीयह कैसा रिश्ता है हम दोनों के बीच कि जब तुम दरवाजे से बाहर निकलते हो तब मैं अपने दरवाजे बंद कर लेती हूँ ...
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बृहस्पतिवार का व्रत

आज बृहस्पतिवार था, इसलिए पूजा को आज काम पर नहीं जाना था...बच्चे के जागने की आवाज़ से पूजा जल्दी से चारपाई से उठी और उसने ...
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लघुकथा: प्रेमचंद- बाबाजी का भोग

रामधन अहीर के द्वार एक साधू आकर बोला- बच्चा तेरा कल्याण हो, कुछ साधू पर श्रद्धा कर। रामधन ने जाकर स्त्री से कहा- साधू द्वार ...
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