तुम्हारी रंगहीन यादें
धूप के पीले कालीन पर
नाजुक दूब के हरे बूटों में बिखरी
तुम्हारी रंगहीन यादें...!
बहुत कोशिशें की
यादों में भर दूँ कुछ ऐसे रंग
जो कभी फीके ना पड़ें,
लेकिन हर बार गहरा होता गया
दूब का हरा रंग
और छूटता गया
तुम्हारी यादों का संग।
बहुत मुश्किल है तुम्हें याद करना।
और उससे भी मुश्किल है
तुम्हें भूल जाना।
नाजुक दूब के हरे बूटों में बिखरी
तुम्हारी रंगहीन यादें...!
बहुत कोशिशें की
यादों में भर दूँ कुछ ऐसे रंग
जो कभी फीके ना पड़ें,
लेकिन हर बार गहरा होता गया
दूब का हरा रंग
और छूटता गया
तुम्हारी यादों का संग।
बहुत मुश्किल है तुम्हें याद करना।
और उससे भी मुश्किल है
तुम्हें भूल जाना।
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