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मप्र में इस बार भी छात्र संघों का मनोनयन

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भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के इस वर्ष भी छात्र संघों के चुनाव एक बार फिर अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराने के निर्णय की भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कड़ी आलोचना की है।

उच्च शिक्षा से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि राज्य शासन ने छात्र संगठनों की मांग को नकारते हुए इस बार भी अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही छात्र संघों का गठन करने का निर्णय लिया है और इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

इस बार 20 एवं 21 अक्टूबर को महाविद्यालयों में छात्र संघ का मनोनयन किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने कल इसकी मनोनयन प्रक्रिया जारी कर दी। इस बार चुनाव प्रक्रिया से विश्वविद्यालयों को दूर रखा गया है। इनके अलावा सभी सरकारी, निजी, स्वशासी तथा उत्कृष्ट संस्थानों में चुनाव कराया जाएगा।

पहले दिन 20 अक्टूबर को कक्षा प्रतिनिधियों का चयन होगा। मनोनीत कक्षा प्रतिनिधियों में से ही अगले दिन चारों पदाधिकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव तथा सहसचिव का मनोनयन किया जाएगा। प्रक्रिया के अंतिम दिन 21 अक्टूबर को शाम छह बजे शपथ ग्रहण होगा।

सूत्रों ने कहा कि राज्य शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक स्नातक कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए न्यूनतम 17 और अधिकतम 22 वर्ष का होना अनिवार्य है, जबकि स्नातकोत्तर कक्षाओं के लिए अधिकतम 25 और शोध विद्यार्थियों के लिए अधिकतम आयु 28 वर्ष रखी गई है। विधि, बीएड एवं एमएड के छात्रों को 2004-05 के बाद 12वीं उत्तीर्ण होना जरुरी है।

राज्य शासन ने मनोनयन प्रक्रिया की कार्रवाई एवं सुरक्षा संबंधी तैयारियों के लिए व्यापक निर्देश प्राचार्यो को दिए हैं।

दूसरी ओर, एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आकाश आहूजा ने सरकार के इस फैसले को छात्र विरोधी बताते  हुए कहा है कि वह राजनीति की नर्सरी को जड़ से मिटाना चाहती है। मेरिट के आधार पर मनोनयन से नेतृत्व प्रतिभा उजागर नहीं हो सकती है। सरकार के फैसले का प्रदेश भर में विरोध किया जाएगा।

एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री वीडी शर्मा ने सरकार के निर्णय को छात्र-छात्राओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का भी उल्लंघन है और इस पर सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना का प्रकरण दर्ज कराएगा और सड़क पर भी प्रदर्शन होंगे।

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