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अफसर तर, प्रदेश सूखा

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भोपाल। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा गांवों में पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर पानी की तरह बहाए गए करोड़ों रुपयों के बाद भी भले ही गांवों का सूखा दूर नहीं हो पाया हो, लेकिन इस कार्य में लगे छोटे से लेकर बडे़ अधिकारी जरूर ऊपर से नीचे तक तर हो गए हैं। इस बात का खुलासा हाल ही में समीक्षा बैठक के दौरान हुआ। आज भी प्रदेशभर की 20 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना बंद पड़ी हुई हैं।

इस मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग का तर्क है कि उनके द्वारा नई नल-जल योजना शुरू कर उसे ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया जाता है। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी होती है कि वो उसका संचालन करें और खराब होने पर उसका संधारण करे। वहीं ग्राम पंचायतों का कहना है कि हमारे पास बजट का अभाव है जिसके चलते नल-जल योजनाएं में किसी भी तकनीकी खराबी आने के बाद उसका संधारण नहीं कर पाते हैं। इतना ही नहीं कई ग्राम पंचायतों का यह भी कहना है कि उनके द्वारा सप्लाई किए जा रहे पेयजल का भुगतान ग्रामीणों द्वारा नहीं करने पर बिजली के बिल जमा नहीं हो पाने के कारण कनेक्शन कट गए हैं, जिसके चलते नल जल योजना पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है।

इस वर्ष के लिए 740 करोड़ : नल जल योजना और हैडपंपों के लिए पीएचई द्वारा 740 करोड़ की योजना तैयार की गई है, उक्त राशि में से पचास फीसदी केन्द्र सरकार देगी और पचास फीसदी राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2010-11 में बसाहटों के लिए 173 करोड़ हैडपंप के लिए और 199 करोड़ नल-जल योजना के लिए स्वीकृत किए हैं।

इस राशि में से पचास फीसदी राशि केन्द्र ने राज्य शासन को दे दी है शेष पचास फीसदी राशि राज्य सरकार द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर केन्द्र द्वारा दी जाएगी।

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