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मानसून सत्र में 5 सांसदों ने बनाया रिकार्ड

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नई दिल्ली। संसद के हाल ही में संपन्न मानसून सत्र में लोकसभा में भले ही 35 फीसदी सांसदों ने किसी प्रश्नकाल, परिचर्चा या विधेयक पर हुई चर्चा में हिस्सा नहीं लिया हो लेकिन निचले सदन के पांच सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने का रिकार्ड बनाया जिनमें भाजपा के अजुन राम मेघवाल और राजद के डा. रघुवंश प्रसाद सिंह भी शामिल हैं।

स्वतंत्र ईकाई पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च द्वारा की गई मानसून सत्र की समीक्षा के आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा में सांसदों के हंगामे के चलते दस दिन प्रश्नकाल पर पानी फिर गया और पारित किए गए आठ विधेयक ऐसे थे जिन पर चर्चा और उन्हें पारित कराने की कार्रवाई में दो घंटे से भी कम का समय दिया गया।

पीआरएस के आंकड़ों से पता चलता है कि लोकसभा में 35 फीसदी सांसद ऐसे थे जिन्होंने किसी भी चर्चा या परिचर्चा में हिस्सेदारी नहीं की और वे मूक दर्शक बनकर बैठे रहे। 24 फीसदी ने प्रश्नकाल में कोई प्रश्न नहीं किया और 97 फीसदी ने कोई निजी विधेयक पेश नहीं किया।

संसदीय कार्यवाही में सांसदों की इस घटती रूचि के विपरीत भाजपा के अर्जुन राम मेघवाल, सपा के शैलेंद्र कुमार, राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह और बीजद के भृतुहरि मेहताब उन शीर्ष पांच सांसदों में अपना नाम शुमार कराने में सफल रहे जिन्होंने लोकसभा में हुई चर्चाओं, परिचर्चाओं में सबसे अधिक बढ़चढ़कर भाग लिया।

पीआरएस के विश्लेषकों के अनुसार, इन विधायकों ने न केवल अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाया बल्कि नियम 193 के तहत हुई चर्चाओं, विधेयकों पर हुई चर्चाओं, नियम 377 के तहत मुद्दे रखने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हुई परिचर्चाओं में भी सक्रियता और प्रभावी तरीके से भाग लिया।

आंकड़ों से पता चलता है कि लोकसभा में 24 फीसदी यानी 117 सांसदों ने जबकि राज्यसभा में 34 फीसदी यानी 79 सांसदों ने प्रश्नकाल में कोई सवाल नहीं किया। इसी प्रकार निचले सदन में 65 सांसदों ने एक से पांच सवाल, 119 सांसदों ने छह से 20 सवाल और 134 सांसदों ने 21 से 50 सवाल किए। इसके अलावा 50 से अधिक सवाल पूछने वाले सांसदों की संख्या मात्र 44 यानी नौ फीसदी थी।

राज्यसभा में भी हालात कुछ बेहतर नहीं रहे जहां 34 फीसदी सांसदों ने कोई सवाल नहीं किया जबकि 50 से अधिक सवाल मात्र दस फीसदी सांसदों ने ही किए।

हाजिरी के लिहाज से लोकसभा में 90 फीसदी से अधिक हाजिरी देने वाले सांसदों का प्रतिशत 41 फीसदी यानी संख्या 195 थी जबकि 50 फीसदी से भी कम हाजिर रहने वाले सांसदों की संख्या नौ फीसदी यानी 41 थी।

उधर राज्यसभा में भी 90 फीसदी से अधिक उपस्थित रहने वाले सांसदों की संख्या 93 यानी 43 फीसदी थी जबकि 50 फीसदी से कम हाजिरी देने वाले सांसदों की संख्या 11 फीसदी थी।

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