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महंगाई के कारण मनमोहन की साख दांव पर

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नई दिल्ली। महंगाई को रोकने के सरकार के सारे प्रयास 'मृगमरीचिका' साबित होने का आरोप लगाते हुए मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की साख दांव पर लग गई है। हालांकि कांग्रेस ने इस संबंध में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जोरदार बचाव करते हुए विपक्ष से इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार नहीं बनाने तथा इससे निपटने के लिए सकारात्मक सुझाव देने की अपील की।

राज्यसभा में महंगाई के मुद्दे पर पेश प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते हुए विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि संप्रग सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में पिछले 14 महीने के दौरान महंगाई रोकने के बारे में जो भी घोषणाएं कीं और आश्वासन दिए, वे 'मृगमरीचिका' साबित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री, योजना के आयोग के उपाध्यक्ष, वित्त मंत्री और कृषि मंत्री के तमाम दावों के बावजूद मुद्रास्फीति और खाद्यान्न की कीमतें बढ़ने की रफ्तार जारी है।

विपक्ष के नेता ने कहा कि हमारे समाज में कहावत है कि लोग कमाई के बारे में पूछने पर कहते हैं कि बस दाल-रोटी चल जाती है। आज महंगाई की यह स्थिति है कि आम आदमी हाथ से दाल-रोटी भी छिन रही है।

उन्होंने कहा कि महंगाई के कारण लोगों की बचत राशि भी खत्म होती जा रही है। इससे सेवानिवृत्त लोगों पर विशेष तौर पर असर पड़ रहा है। अर्थव्यवस्था में जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, उस अनुपात में ब्याज की दर में इजाफा नहीं हो रहा है। इससे भी आम आदमी पर विपरीत असर पड़ रहा है।

जेटली ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति मापने की व्यवस्था को खत्म करना चाहिए क्योंकि यह सूचकांक सही स्थिति नहीं बताता। इसके स्थान पर खुदरा मूल्य के आधार पर मुद्रास्फीति निर्धारित की जानी चाहिए।

जेटली ने कहा कि सरकार मूल्यवृद्धि, कश्मीर में घाटी के मौजूदा हालात, माओवाद की समस्या, केंद्र सरकार के भीतर चल रहे आपसी घमासान और पाकिस्तान के साथ हाल में हुई बातचीत में हुई किरकिरी के मामले में बिल्कुल मौन साधे हुए है। उन्होंने कहा कि इसके बजाय सरकार अपना सारा ध्यान जांच एजेंसियों से विपक्षी दलों के शासन वाली सरकारों और उनके नेताओं के खिलाफ जांच कराने में लगाए हुए है।

उन्होंने कहा कि आप भले ही विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसी का इस्तेमाल करें लेकिन आम आदमी को महंगाई का शिकार बनाने से बाज आएं।

जेटली ने कहा कि सरकार में सत्ता के कई केंद्र हैं। कोई कोलकाता से बैठकर काम कर रहा है तो कोई चेन्नई में बैठकर अपने मंत्रालय चला रहा है। वे अपने मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं चाहते।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक मुद्रास्फीति के जो भी 'बहाने' दिए, वे सब गलत साबित हुए हैं। सरकचर कच्चे तेल का मूल्य बढ़ने का तर्क दे रही है लेकिन पिछले करीब नौ महीने च्ें कच्चे तेल की कीमतों में दो से तीन डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अपने देश में खाद्यान्न का बंपर उत्पादन हुआ है।

जेटली ने कहा कि चीन, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, श्रीलंका जैसे हमारे समान परिस्थितियों वाले देशों में खाद्यान्न की मुद्रास्फीति काफी घटी है लेकिन हमारे यहां यह दर लगातार बढ़ती जा रही है।

उच्च सदन में विपक्ष के नेता ने कहा कि खाद्यान्न की मुद्रास्फीति बढ़ने का असली कारण अनाजों का प्रबंधन नहीं होना है। हमारे गोदामों में लाखों टन अनाज सड़ गया है। यदि अनाजों का बेहतर प्रबंधन हो तो कीमतों को रोकने में काफी मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकार पेट्रोलियम पदार्थो पर भारी कर ले रही है। इसके कारण उपभोक्ताओं को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। जेटली ने कहा कि सरकार सब्सिडी के नाम पर तेल विपणन कंपनियों को जो भारी धनराशि दे रही है और करों की ऊंची दर लगा रही है, उसे कम कर उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जा सकती है।

कांग्रेस की जयंती नटराजन ने चर्चा में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष मूल्यवृद्धि के कारण लोगों को हो रही पीड़ा को राजनीतिक हथियार बना रहा है। महंगाई एक ऐसा मुद्दा है जिस पर केंद्र और राज्य सरकारों को सामूहिक तौर पर प्रयास करने होते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस मामले में सकारात्मक सुझाव देने चाहिए।

जयंती ने कहा कि विपक्ष आम आदमी के मुद्दों के प्रति कितना संवेदनशील है, यह बात महंगाई के मुद्दे पर विपक्षी दलों के पांच जुलाई को भारत बंद के आह्वान से स्पष्ट हो गई। उद्योग संगठन फिक्की के अनुसार इस बंद के कारण अर्थव्यवस्था को 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा।

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