स्वास्थ्य विभाग में 11 करोड़ रु. घोटाले का आडिट शुरू
ब्यूरो / बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। घोटालों के लिए प्रसिद्ध स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर दीनदयाल के नाम पर की गई 11 करोड़ रुपए की अनियमितताओं का मामला उजागर होने के बाद उसे दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है। हालांकि सोमवार से वित्त विभाग ने मामले का ऑडिट शुरू किया है। मामला दो सालों में लगभग 15 जिलों को मनमाने ढंग से बांट गए बजट का है। अनियमितता की जानकारी आला अधिकारियों से लेकर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा को भी थी, लेकिन जांच नहीं की गई।
बिना दस्तावेजों के बांट दिया रुपया
प्रदेश में जारी चिकित्सा गारंटी या दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना के अंतर्गत बीपीएल मरीजों के इलाज से जुड़ा है। वर्ष 2007-08 में 12 जिलों और 2008-09 में 15 जिलों को योजना के अंतर्गत मांग के विरुद्ध बजट आवंटन किया गया। इन दोनों वर्षों में बजट लगातार दिया जाता रहा लेकिन इसके कोई प्रमाण विभाग के पास मौजूद नहीं हैं। उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि औषधि मद के अतिरिक्त अन्य प्रभार, विज्ञापन और प्रचार प्रसार, कार्यालय व्यय और मुद्रण प्रकाशन का समस्त बजट आवंटन बजट शाखा के द्वारा योजना से संबंधित कार्यक्रम अधिकारी से प्रस्ताव प्राप्त किए बिना ही करवाया गया है। इन मदों के तहत 112.66 करोड़ का आवंटन किया गया जिसमें से मात्र 150.00 लाख का आवंटन सक्षम अधिकारी के अनुमोदन से किया गया जबकि शेष राशि 11.16 करोड़ के संबंध में वित्तीय सलाहकार द्वारा बताया गया है कि इस बजट की शाखा में कोई नस्ती उपलब्ध नहीं है।
इन जिलों को बंटा मनमाने ढंग से बजट
2007-08 में बड़वानी, छिंदवाड़ा, डिण्डोरी, झाबुआ, खरगोन, मंडला, इंदौर, नीमच, बालाघाट, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन।
2008-09 में बड़वानी, छिंदवाड़ा, डिण्डोरी, झाबुआ, खरगोन, मंडला, इंदौर, नीमच, बालाघाटा, देवास, खंडवा, सागर, सतना और ग्वालियर।
यह है प्रक्रिया
तत्कालीन संचालक एसके जोशी ने इस बारे में दस्तावेज उपलब्ध करवाने के बजाय यह बताया कि पूरा बजट संचालक और आयुक्त के अनुमोदन के बाद ही सर्वर के माध्यम से आवंटन करने हेतु सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद जिलों को भी पहुंचता है। लेकिन 11.16 करोड़ रुपए के आवंटन में इस पूरी प्रक्रिया का विभाग के पास कोई दस्तावेज नहीं मिला।
भोपाल (डीएनएन)। घोटालों के लिए प्रसिद्ध स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर दीनदयाल के नाम पर की गई 11 करोड़ रुपए की अनियमितताओं का मामला उजागर होने के बाद उसे दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है। हालांकि सोमवार से वित्त विभाग ने मामले का ऑडिट शुरू किया है। मामला दो सालों में लगभग 15 जिलों को मनमाने ढंग से बांट गए बजट का है। अनियमितता की जानकारी आला अधिकारियों से लेकर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा को भी थी, लेकिन जांच नहीं की गई।
बिना दस्तावेजों के बांट दिया रुपया
प्रदेश में जारी चिकित्सा गारंटी या दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना के अंतर्गत बीपीएल मरीजों के इलाज से जुड़ा है। वर्ष 2007-08 में 12 जिलों और 2008-09 में 15 जिलों को योजना के अंतर्गत मांग के विरुद्ध बजट आवंटन किया गया। इन दोनों वर्षों में बजट लगातार दिया जाता रहा लेकिन इसके कोई प्रमाण विभाग के पास मौजूद नहीं हैं। उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि औषधि मद के अतिरिक्त अन्य प्रभार, विज्ञापन और प्रचार प्रसार, कार्यालय व्यय और मुद्रण प्रकाशन का समस्त बजट आवंटन बजट शाखा के द्वारा योजना से संबंधित कार्यक्रम अधिकारी से प्रस्ताव प्राप्त किए बिना ही करवाया गया है। इन मदों के तहत 112.66 करोड़ का आवंटन किया गया जिसमें से मात्र 150.00 लाख का आवंटन सक्षम अधिकारी के अनुमोदन से किया गया जबकि शेष राशि 11.16 करोड़ के संबंध में वित्तीय सलाहकार द्वारा बताया गया है कि इस बजट की शाखा में कोई नस्ती उपलब्ध नहीं है।
इन जिलों को बंटा मनमाने ढंग से बजट
2007-08 में बड़वानी, छिंदवाड़ा, डिण्डोरी, झाबुआ, खरगोन, मंडला, इंदौर, नीमच, बालाघाट, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन।
2008-09 में बड़वानी, छिंदवाड़ा, डिण्डोरी, झाबुआ, खरगोन, मंडला, इंदौर, नीमच, बालाघाटा, देवास, खंडवा, सागर, सतना और ग्वालियर।
यह है प्रक्रिया
तत्कालीन संचालक एसके जोशी ने इस बारे में दस्तावेज उपलब्ध करवाने के बजाय यह बताया कि पूरा बजट संचालक और आयुक्त के अनुमोदन के बाद ही सर्वर के माध्यम से आवंटन करने हेतु सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद जिलों को भी पहुंचता है। लेकिन 11.16 करोड़ रुपए के आवंटन में इस पूरी प्रक्रिया का विभाग के पास कोई दस्तावेज नहीं मिला।
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