भ्रष्टों की तू-तू मैं-मैं
भोपाल (डीएनएन)। कुलीन कुनबे के कलंकित भ्रष्टों पर इन दिनों अनोखा शगल भूत बनकर मंडरा रहा है। शिव के गण कभी अपने विभागों के कर्मचारियों को भ्रष्ट की संज्ञा देते हैं तो कभी कमजोर बता देते हैं। भ्रष्टों की इस तू-तू मैं-मैं की बानगी देखिए।
कभी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजित रहे नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर एक साक्षात्कार में कह गए कि पचास प्रतिशत कर्मचारी कामचोर हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि भ्रष्टाचार भारत में तब तक समाप्त नहीं हो सकता, जब तक भारत पूर्ण विकसित राज्य नहीं बन जाता। इसी प्रकार गौर के चेले रहे गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता दो कदम आगे बढ़ते हुए कह गए कि मध्यप्रदेश की पुलिस इतना भ्रष्टाचार नहीं करती, जितना प्रदेश के अन्य विभागों में होता है। बानगी देते हुए एक-दो विभागों के इंजीनियर के पद नाम भी बताए। साथ ही यह कहा कि पुलिस का भ्रष्टाचार इसलिए दिखाई देता है, क्योंकि वे सड़कों पर वसूली करती है।
एक और मंत्री है करण सिंह वर्मा जो राजस्व विभाग संभाल रहे हैं। इन्हें खुलेआम कहने में हिचक नहीं हैं कि पटवारी से लेकर तहसीलदार तक सब एक जैसे भ्रष्ट हैं। वर्मा ने नीमच में कहा कि मैं जानता हूं कि राजस्व विभाग भ्रष्टाचार में सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि यह जन चर्चा शुरू से ही रही है कि राजस्व विभाग में काम बिना लेन-देन के नहीं होता है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ मैंने अभियान छेड़ा है, जिसके लिए मैं हर जिले में जा रहा हूं। राजस्व अमले और जनता से मिल रहा हूं। अधिकारियों से लेकर पटवारियों तक को लेन-देन न करने की हिदायत दे रहा हूं। जनता से भी आग्रह है यदि कोई उनसे किसी काम के रुपए मांगता है, तो वो मुझे सीधे पोस्ट कार्ड लिखें, मैं उन पर कार्रवाई करूंगा। सामान्य प्रशासन मंत्री केएल अग्रवाल तो अपने ही साथियों के दागों पर खुलेआम टिप्पणी कर गए कि शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश सरकार में बिराजे अन्य दागी मंत्रियों पर भी कार्रवाई करना चाहिए, जो पार्टी हित में होगा। अग्रवाल का बयान अनूप मिश्रा के इस्तीफे के बाद सामने आया।



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