Welcome to Bichhu.com: कांग्रेसी पर मेहरबान राजेंद्र शुक्ल कांग्रेसी पर मेहरबान राजेंद्र शुक्ल ================================================================================ bichhu on 02 March, 2010 09:26:00 विशेष प्रतिनिधि / बिच्छू डॉट कॉम भोपाल (डीएनएन)। आयकर छापे में अकूत दौलत को लेकर चर्चा में आए खदान माफिया पवन मित्तल अकेले ऐसे नहीं हैं जिन पर प्रदेश का खनिज विभाग मेहरबान रहा है। खदानों के आवंटन में पैसे का इतना बोलबाला है कि सरकार ने बारी में ऊपर रहे अपनी ही पार्टी के एक नेता को दरकिनार कर एक कांग्रेसी को मेगनीज एवं लौह अयस्क की खदान आवंटित कर दी। अपनों के द्वारा छले गए इस नेता की व्यथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंच गयी, लेकिन भला कांग्रेसी नेता का ही हुआ। क्या है मामला यह मामला जबलपुर जिले के हृदयनगर में सरकारी जमीन पर मेगनीज और लौह अयस्क के खनन पट््टे का है। 2008 में इसका पट््टा हासिल करने के लिए जबलपुर के सचिन खरे ने आवेदन दिया था। यह पट््टा खरे के बाद आने वाली फर्म मरकरी माईन एण्ड मिनरल को दे दिया गया और केंद्र सरकार को अनुमोदन भेज दिया गया। केंद्र सरकार ने अनुमोदन को इस टिप्पणी के साथ प्रदेश सरकार को वापस कर दिया कि सीधे 13 वें आवेदक को खदान का आवंटन नहीं किया जा सकता। नई सरकार में स्वतंत्र प्रभार के खनिज राज्यमंत्री बनने के बाद राजेंद्र शुक्ल ने गत 9 सितंबर को एक बार फिर इस खदान के लिए आवेदन करने वाले सभी लोगोंं को पेशी पर बुलाया। पेशी के दिन भाजपा आईटी सेल के प्रदेश महामंत्री सचिन खरे ने मंत्री के सामने अपना पक्ष रखने के साथ सभी तथ्य बताए। इस पेशी पर सिर्फ मरकरी माईन एण्ड मिनरल की तरफ से कोई भी प्रतिनिधि नहीं पहुंचा था। मंत्री बोले, 'किसी' के लिए बोला गया है नौ सितंबर को पेशी के बाद खरे ने एक बार फिर मंत्री से मुलाकात की तो उन्हें आश्वासन दिया गया कि ध्यान रखा जाएगा। लेकिन खदान मरकरी माईन एण्ड मिनरल को मिली और केंद्र सरकार को एक बार फिर उनके लिए अनुमोदन भेजा गया। आवेदक के शिकायती पत्र के अनुसार तीसरी बारी खनिज मंत्री से मिलने पर मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा फोन पर इस खदान के लिए 'किसीÓ के लिए बोला गया है। यह 'किसीÓ मरकरी माईन एंड मिनरल थी, जो कांग्रेस नेता विनोद अग्रवाल की है। वे पिछले पंद्रह-सोलह साल से खनिज का व्यवसाय कर रहे हैं। पहले भी दी दो खदानें कांग्रेस नेता विनोद अग्रवाल को भाजपा शासनकाल में पहले भी दो खदानें आवंटित हो चुकी हैं। खरे ने अपने पत्र में बताया है कि वे अपनी कमाई को भाजपा के खिलाफ उपयोग करते हैं। उनके बारे में सिहोरा के भाजपा विधायक से पूरी जानकारी लेने की सलाह भी उन्होंने दी। झकझोर दिया इस घटना ने भाजपा आईटी सेल के प्रदेश महामंत्री के रूप में जनवरी 2009 से पार्टी की सेवा कर रहे सचिन खरे ने पत्र में कहा है कि इस घटना ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। कहां उन्होंने सोचा था कि भाजपा के एक सेल का प्रदेश पदाधिकारी होने के नाते उन्हें अपनी दावेदारी साबित नहीं करनी पड़ेगी और हकीकत कुछ और निकली। उन्होंने कहा है कि खदान उन्हें मिलती तो उन्हें अगले 20 साल तक अपने परिवार की चिंता नहीं करनी पड़ती और वे पार्टी को और अधिक समय देकर सेवा कर पाते। उन्होंने व्यथित होकर यह पत्र प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष के मार्फत संगठन के बड़े नेताओं तक भेजा। लेकिन उस पर भी सुनवाई नहीं हुई। खरे ने उठाए सवाल - क्या कारण है कि दो अलग-अलग मंत्रियों के कार्यकाल में एक ही व्यक्ति या संस्था को खदान का आवंटन हुआ? - हमारे वरिष्ठ जन जो बार-बार मंत्रियों को किसी व्यक्ति के लिए अनुशंसा करते हैं तो क्या वे खुद उन व्यक्तियों या संस्था के बारे में कैसे इतने अनभिज्ञ हो सकते हैं....? - ऐसे विषयों पर क्या संगठन ने कोई दिशा निर्देश बनाए हैं। यदि नहीं तो संगठन को ऐसे सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए भविष्य के लिए संगठन और पार्टी के कार्यकर्ताओं को ध्यान में रखते हुए सभी मंत्रियों एवं विभागों के लिए दिशानिर्देश देने होंगे। - मैं मानता हूं कि हमारे नेता और मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं हैंं, किंतु मैं व्यक्तिगत रूप से चाहता हूं कि हमें ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिसमें किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार संभव ही न हो। - क्या हम कभी ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जब हमारे कार्यकर्ता का परिवार प्रसन्नता के साथ उसके पार्टी का कार्यकर्ता होने पर गर्व कर सके? यदि हम प्रदेश के अपने 25 लाख कार्यकर्ताओं का सामाजिक स्तर बेहतर कर सकें तो हम देश की जनता के बीच अपने खोए हुए भरोसे को पुन: स्थापित कर सकेंगे। - सभी को अपने क्षणिक लाभ से ऊपर उठ कर पूरे संगठन को ध्यान में रखना होगा और संगठन को भी ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि कभी ऐसी परिस्थिति निर्मित न हो सके। सरकार को करोड़ों का चूना मध्यप्रदेश के संसदीय इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है, जब प्रदेश के सभी जिलों में खनिज माफियाओं ने सिर उठा रखा है। वे सरेआम खनन, परिवहन और विक्रय में जुटे हैं। सरकार इनके आगे बेबस है। इन माफियाओं को खनिज विभाग, खनिज निगम और संरक्षण प्राप्त है और कहीं-कहीं तो सरकारी अमला भी उनके साथ बंदरबांट कर रहा है। मध्यप्रदेश में कोयला, चूना पत्थर, ताम्र अयस्क, मैगनीज अयस्क, हीरा, डोलोमाइट, बाक्साइट, रॉक फास्फेट, यास्पोर, पायरोफिसाइट, फायरक्ले, लेटेराइट, आयरओर, शेल, केओलीन, गेरू तथा क्ले की खदानें हैं। इनमें से एक भी खदान खनिज माफिया से अछूती नहीं है। हालांकि अवैध खनन रोकने के लिए उडऩदस्ता भी है, किंतु उसकी सुविधाविहीनता का हवाला देकर असफरान अपना दामन बचाते रहते हैं। सरकार इस मामले में कितनी गंभीर है, यह इससे भी समझा जा सकता है कि खनिज अमले के सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव पर उसने अभी तक कोई पहल नहीं की है। उधर मुख्यमंत्री ने अवैध खनन रोकने के लिए जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर जनभागीदार का प्रस्ताव किया था, किंतु एक भी जनप्रतिनिधि ने इसमें सहयोग नहीं किया। इससे स्पष्ट है कि नेताओं के संरक्षण में ही अवैध खनन हो रहा है, जिससे सरकार को करोड़ों की चपत लग रही है। इनका कहना है खदान के संबंध में प्रदेश अध्यक्ष को लिखा मेरा पत्र व्यक्तिगत था। यह पत्र मीडिया तक कैसे पहुंचा यह मैं नहीं जानता। इस मामले में मुझे जो कहना था, मैं कह चुका हूं और संगठन तथा सरकार को जो उचित लगता था वह उसने कर दिया है। सचिन खरे प्रदेश महामंत्री, भाजपा आईटी सेल