चतुराई काम न आई
चतुर होना अच्छी बात है, किंतु अति अतुर होना अच्छा नहीं होता। ऐसा ही अपर सचिव स्तर के एक अफसर के साथ हुआ। मुख्य सचिव कार्यालय में पदस्थ इस अफसर के पास सामान्य प्रशासन जैसा महत्वपूर्ण विभाग था, जिससे इनकी छुट्टी कर दी गई है और राजस्व जैसा ऐसा विभाग दे दिया गया है, जहां सारे काम थैंक्यू में ही हो जाते हैं। इस अफसर को यह समझ में नहीं आ रहा है कि उससे सामान्य प्रशासन विभाग क्यों छीना गया। अंदरखाने की खबर है कि ये अफसर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को अपना ज्ञान बघारते हुए जरूरत से ज्यादा सलाह देने लगे थे। प्रमुख सचिव तो उनसे तंग आ चुकी थी। बाद में मुख्य सचिव भी तंग आ गए तो उन्हें चलता कर दिया गया। पाठकों की सुविधा के लिए बता दें कि ये अफसर भोपाल कलेक्टर रह चुके हैं।
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