लालबत्ती का लालीपॉप
भाजपा के कई नेता इन दिनों लालबत्ती का लालीपॉप चूसने को मजबूर हैं। दरअसल पिछली सरकार के समय से ही लालबत्ती के पचास से अधिक उपक्रमों के पद रिक्त हैं। जब कुछ नेताओं को सत्ता और संगठन से बाहर किया गया था, तब उन्हें सरकार की ओर से आश्वस्त किया गया था कि धैर्य रखो, तुम्हें लालबत्ती जरूर मिलेगी। विधानसभा चुनाव के बाद स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनावों के समय भी यही आश्वासन दोहराया गया, किंतु डेढ़ साल गुजर जाने के बाद भी उन्हें लालबत्ती नसीब नहीं हो पाई। लालबत्ती की आस लगाए बैठे इन नेताओं का मानना है कि समय रहते लाभ का पद मिल जाए तो ठीक, वरना अंतिम दिनों में लाल बत्ती मिली भी तो उसका क्या करेंगे। इनका यह भी मानना है कि भाजपा सत्ता में आने की हैटट्रिक नहीं बना पाएगी। इसलिए वे जल्द से जल्द सत्ता का सुख भोगना चाहते हैं।
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