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9+2 = 11

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भारतीय जनता पार्टी से जुड़े़ एक मोर्चा अध्यक्ष को 'मेरे लायक काम हो तो बताना' कहना भारी पड़ गया। हुआ यूं कि प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा के पूर्व वे एक मोर्चा अध्यक्ष से यह कह गए कि अगर सिफारिश करना हो तो कहो मैं कर देता हूं। अपनी अक्खड़ कार्यशैली के लिए 'कुख्यात' मोर्चा अध्यक्ष कह गए कि 'अगर मैं मर भी रहा होऊंगा तो तुझसे मदद कभी नहीं लूंगा। भूल गए वो दिन जब मैंने तुम्हें अपनी कार्यकारिणी में पद दिया था।'  बस फिर क्या था अहसान चुकाने की कोशिश करने वाले मोर्चा अध्यक्ष ऐसे नौ-दो-ग्यारह हुए कि प्रदेश कार्यसमिति में बड़ी मशक्कत के बाद सिर्फ सदस्य बन पाए।

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