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जलवादारी का रंग

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अपने बाबूलाल गौर और उनके जलवों से सर्वाधिक परेशान भोपाल का जिला प्रशासन रहता है। अभी हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सत्ता गौर को यह सौंपकर गए हैं, कि मैं बाहर जा रहा हूं, जरा प्रदेश का ख्याल रखना। बस फिर क्या था गौर की मनचाही मुराद पूरी हो गई। मुख्यमंत्री की कुर्सी का एक बार स्वाद चखने के बाद गौर के मन में अभी भी हसरत है, कि एक चांस और मिल जाए। लेकिन पूरी होने की संभावना हाल फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही। सत्ता की चाबी हाथ आते ही गौर ने मीडिया में इस बात को जोरदार ढंग से प्रचारित भी करवा दिया और प्रदेश के कई बड़े दिग्गज अफसरों को बुलावा भी भेज दिया और ताजे राजनीतिक हालातों पर चर्चा भी शुरू कर दी। अमूमन होता यह आया है कि मुख्यमंत्री शिष्टाचारवश जवाबदारी सौंप कर जाते हैं। लेकिन अपने अंदाज से काम करने वाले उसमें भी रास्ता निकाल लेते हैं।  गौर भगवान से अब यही प्रार्थना कर रहे हैं कि ऐसी ही छत्री का सहारा बनाए रखे।
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