एक्वेरियम और वास्तु का संबंध
मछली का एक्वेरियम यूँ तो लोग शौक से अपने घरों में रखते हैं लेकिन वास्तुशास्त्रियों की मानें तो बिना जानकारी लिए घर में एक्वेरियम रखना नुकसानदेय साबित हो सकता है। इतना ही नहीं एक्वेरियम को केवल शोपीस की तरह सजाने से काम नहीं चलता, बल्कि मछलियों की देखभाल करना भी जरूरी है। छोटे-बड़े विभिन्न साइज के एक्वेरियम हर किसी ने कभी न कभी तो देखा ही होगा। लेकिन ऐसा कम ही लोगों को पता होगा कि एक्वेरियम खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञ मीना के अनुसार एक्वेरियम खरीदते हुए यह न सोचें कि आप उसे अपने घर की शोभा बढ़ाने के लिए खरीद रहे हैं। क्योंकि एक्वेरियम खरीदते हुए आपकी जिम्मेदारी मछलियों के प्रति भी बढ़ जाती है। एक्वेरियम खरीदने वाले शख्स को मछली के खान-पान का भी अच्छी तरह ध्यान रखना चाहिए। साथ ही समय-समय पर उसका पानी भी बदलना चाहिए। क्योंकि ऐसी बातों पर कम ही लोग ध्यान देते हैं, इसलिए उनके एक्वेरियम की मछलियाँ मर जाती हैं। अंदर से जब तक मोह नहीं होगा, तब तक पक्षी हो या छोटा-बड़ा कोई भी जानवर उसे आप नहीं पाल सकते हैं। ड्राइंग रूम को केवल सजाने भर के नाम पर बड़े से बड़ा एक्वेरियम रखना अक्लमंदी नहीं है। जो लोग नॉनवेज खाते हैं। खासतौर से जो लोग मछली खाते हैं उन्हें अपने घर में एक्वेरियम नहीं रखना चाहिए। क्योंकि यदि आप मछली खाते हैं तो उसके प्रति दया भावना आप में नहीं जागेगी। वह शख्स नहीं पहचान पाएगा कि कब एक्वेरियम वाली मछली को पीड़ा हो रही है, कब उसे क्या चाहिए?
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